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एक्सप्रेसवे-हाईवे ने बदली इकोनॉमी की स्पीड, अब ये सिर्फ सड़कें नहीं, रोजगार-कारोबार के बड़े ड्राइवर, समझें कैसे

एक्सप्रेसवे सिर्फ हमारे ट्रैवल करने का तरीका ही नहीं बदला है, बल्कि लोगों को नौकरी ढूंढने, बिजनेस बढ़ाने और कनेक्टेड रहने में भी मदद कर रहा है।

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गंगा एक्सप्रेसवे (AI Image)
Authored by: Alok Kumar
Updated Apr 29, 2026, 12:13 IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 594 किलोमीटर लंबे 'Ganga Expressway' का उद्घाटन करेंगे। यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा की दूरी कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान भी देगा। मौजूदा समय में एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे महज आवाजाही के रास्ते नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के 'ग्रोथ इंजन' बन चुके हैं। जब भी किसी क्षेत्र से कोई नया एक्सप्रेसवे गुजरता है, वह अपने साथ चौतरफा विकास लेकर आता है। इसके किनारों पर विकसित होने वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और लॉजिस्टिक हब बड़ी कंपनियों को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होते हैं।

पिछले एक दशक में भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। सड़कों के इस बढ़ते जाल ने न केवल व्यापार को सुगम बनाया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर देश की GDP को नई रफ्तार दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि कैसे एक्सप्रेसवे और हाइवे भारत की विकास रफ्तार को तेज कर रहे हैं।

पिछले 10 सालों में बदली देश की तस्वीर

ग्रोथ की रीढ़ भारत के हाईवे और एक्सप्रेसवे पिछले दस सालों में तेजी से बढ़े हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत ने यह साबित कर दिया है कि "सड़कें अर्थव्यवस्था को नहीं बनातीं, बल्कि सड़कें वो माध्यम हैं जिससे अर्थव्यवस्था खुद को बनाती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की लीडरशिप में, भारतमाला प्रोजेक्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट देश की ट्रैफिक को बेहतर बनाने के लिए 83,000 km से ज्यादा सड़कें बना रहे हैं। ये नए रोड नेटवर्क सिर्फ जगहों को जोड़ने से कहीं ज्यादा बिजनेस को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। देशभर में एक्सप्रेसवे और हाईवे बनने से र्फैक्ट्ररियों को कच्चा माल जल्दी मिल रहा है। इतना ही नहीं, जरूरी सामान बाजारों तक आसानी से पहुंच रहा है।

देश में समावेशी विकास को मिल रहा बल

एक्सप्रेसवे आज सिर्फ आने-जाने का समय कम करने से कहीं ज्यादा, देश के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ आगे बढ़ने में मदद कर रहा है। उदाहरण के लिए, अमृतसर से जामनगर एक्सप्रेसवे एक बड़े इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तौर पर काम कर रहा है, जो पंजाब, राजस्थान और गुजरात में नए मौके खोल रहा है। इसी तरह, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में कनेक्टिविटी बदल रहा है, जिससे रास्ते में पड़ने वाले छोटे शहरों में टूरिज्म, व्यापार और एग्रो-इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल रहा है। लुधियाना-बठिंडा-अजमेर एक्सप्रेसवे और वारंगल से खम्मम एक्सप्रेसवे जैसे सेंट्रल बेल्ट भी नए इंडस्ट्रियल एस्टेट, बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम और नौकरियां पैदा कर रहे हैं, जो छोटे शहरों को पहले कभी नहीं हुए देश की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं।

Expressway Economy

Expressway Economy

नए एक्सप्रेसवे और हाईवे से ऐसे मिलता है फायदा?

निर्माण, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में पिछले तीन सालों में रोजगार में 25% की वृद्धि हुई है।

  • पहले दिल्ली से मुंबई या लखनऊ से मेरठ की यात्रा में जो समय लगता था, वह अब एक्सप्रेसवे के कारण आधा रह गया है। यात्रा का समय कम होने का मतलब, ईंधन की कम खपत और वाहनों का कम रखरखाव।
  • एक्सप्रेसवे ने ई-कॉमर्स को गांव-गांव तक पहुंचने में मदद दी है। अब फ्लिपकार्ट-अमेजन छोटे शहरों में भी "नेक्स्ट डे डिलीवरी" देने लगे हैं।
  • फूड प्रोसेसिंग और एग्री-स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि अब किसान अपने ताजे माल को प्रोसेसिंग यूनिट्स तक जल्दी भेज सकता है।
  • पर्यटन को भी गति मिली है। वाराणसी, अयोध्या, देहरादून, मसूरी, जैसे स्थानों पर अब पहुंचना आसान हो गया है। इससे होटल, ट्रैवल, टूर गाइड जैसी सर्विसेज में रोजगार बढ़ा है।
  • एक्सप्रेसवे अपने साथ केवल गाड़ियां नहीं, बल्कि नौकरियों का बड़ा अवसर पैदा हुआ है। एक्सप्रेसवे के निर्माण से हजारों इंजीनियरों, श्रमिकों और ऑपरेटरों की जॉब मिल रही है। इसके बाद टोल प्लाजा, वे-साइड एमिनिटीज (ढाबे, होटल, पेट्रोल पंप) और मेंटेनेंस सेवाओं में हजारों स्थानीय लोगों को स्थायी काम मिल रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण जब कंपनियां अपनी फैक्ट्रियां एक्सप्रेसवे के पास लगाती हैं, जिससे युवाओं को शहर पलायन किए बिना अपने ही क्षेत्र में 'व्हाइट कॉलर' और 'ब्लू कॉलर' जॉब्स मिल रहा है।
NH and Expressway Economy

NH and Expressway Economy

ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में पहुंचा विकास

देशभर में एक्सप्रेसवे और हाईवे के विस्तार होने से डेवलपमेंट अब बड़े शहरों से आगे बढ़कर भारत के ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों तक पहुंच सरहा है। बेहतर सड़कें पूरे भारत में लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बना रही हैं। सफर तेज और सुरक्षित हो गया है और स्कूलक हॉस्पिटल और काम की जगहों तक पहुंचना आसान हो गया है। किसान अब अपनी उपज बाजारों तक जल्दी पहुंचा रहे हैं, जिसका मतलब है कि कटाई के बाद कम बर्बादी हो रही। बेहतर सड़कें सिर्फ आने-जाने के लिए नहीं हैं, बल्कि लोगों को कनेक्टेड रहने और बेहतर जिंदगी जीने में मदद कर रही हैं।

भारत में लंबे समय तक विकास कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रहा। लेकिन एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने छोटे शहरों और कस्बों को भी मुख्यधारा से जोड़ दिया है। अब कंपनियां सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी निवेश कर रही हैं। इससे क्षेत्रीय असमानता कम हो रही है और संतुलित विकास को बढ़ावा मिल रहा है।

बिजनेस करना आसाना हुआ

एक्सप्रेसवे के साथ जुड़े हाई-स्पीड कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स को बदल रहे हैं। पोर्ट, एयरपोर्ट और बॉर्डर चेकपॉइंट तक आसान रोड कनेक्टिविटी से ट्रेड का फ्लो आसान हुआ है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में कॉम्पिटिटिवनेस के लिए एक जरूरी शर्त है। सस्टेनेबिलिटी और फ्यूचर-रेडी सड़कें आज के एक्सप्रेसवे सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह तेज़ी से पहुंचने से कहीं ज्यादा हैं। वे एक ज्यादा साफ, स्मार्ट भविष्य बनाने के बारे में हैं। नए हाईवे पर अब इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन, सोलर-पावर्ड लाइट, बारिश का पानी इकट्ठा करने के सिस्टम और रास्ते में हरे-भरे पैच हैं। यह दिखाता है कि तरक्की प्रकृति के लिए भी अच्छी हो सकती है। टेक्नोलॉजी यात्रा को भी आसान बना रही है। FASTag के साथ, टोल बूथ पर रुकने की कोई जरूरत नहीं है। स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम जाम को मैनेज करने और सड़कों को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

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