Explainer: सोने की कीमत में ऐतिहासिक तेजी के पीछे क्या है वजह, सिर्फ ट्रंप की नीतियां या कुछ और?

सोने की कीमतें आमतौर पर अनिश्चितता की अवधि के दौरान बढ़ती हैं, फिर स्थिर हो जाती हैं, फिर आर्थिक अनिश्चतता होने पर बढ़ती हैं। उदाहरण के लिए, जून 2020 और फरवरी 2024 के बीच, सोने की कीमतें 1,600 डॉलर और 2,100 डॉलर प्रति औंस के बीच उतार-चढ़ाव करती रहीं, बिना ज्यादा ऊपर या नीचे जाए। 2024 में सोने की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

पिछले दो सालों में सोने ने अपने निवेशकों को मालामाल किया है। इस साल अबतक सोने ने निवेशकों को करीब 60% का रिटर्न दिया है। इसकी वजह सोने की कीमत में लगातार तेजी जारी रहना है। बुधवार को ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस (31.1 ग्राम) को पार करते हुए ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई है। भारतीय बाजार में भी सोने की कीमत 1,24,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की रिकॉर्ड हाई पर है। आपको बता दें कि साल 2023 में सोने का भाव 65 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। आप सहज अंदाजा लगा सकता है कि सोने की कीमत किस रफ्तार से बढ़ी है। गुरुवार को MCX पर भी सोने की कीमत 123,109 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

सोने में उछाल

सोने में उछाल

आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोने को लंबे समय से एक पसंदीदा 'सेफ हेवन' माना जाता रहा है क्योंकि यह एक भौतिक वस्तु है जिसका स्वामित्व और भंडारण किया जा सकता है। सोने की कीमत में तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद हुआ है। उनके द्वारा शुरू किए गए टैरिफ वॉर ने सोने की कीमत में तेज उछाल लाने का काम किया है। तो, क्या ट्रंप ही सोने की कीमत को रिकॉर्ड स्तर पर ले गए हैं? कमोडिटी एक्सपर्ट ऐसा नहीं मानते हैं। आइए जानते हैं कि सोने की कीमत में लगातार तेजी के पीछे की क्या-क्या वजह हैं?

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