8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए संदर्भ शर्तों (Terms of Reference- ToR) को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन और पेंशनभोगियों के पेंशन की व्यापक समीक्षा का रास्ता साफ हो गया। सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन की समीक्षा करने के लिए 3 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। उनके साथ आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष (आंशिक सदस्य) और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन (सदस्य सचिव) होंगे। ये तीनों लोग 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन और पेंशन की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट 18 महीने के अंदर सौंपेंगे। उम्मीद की जा रही है कि सरकार 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की मंजूरी दे सकती है। ऐसा इसलिए कि यह समय केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 10 साल के रिवीजन साइकिल के अनुरूप है।
8वें वेतन आयोग लागू होने से पहले सिविल सेवा, रक्षा, दूरसंचार, रेलवे और डाक विभाग के करीब 50 लाख कर्मचारी चर्चा में हैं। इनके वेतन में कितनी वृद्धि होगी, इस पर बात हो रही है। ऐसा इसलिए कि ये कर्मचारी देश भर में सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि नए वेतन आयोग से सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों को ही फायदा होने वाला है। इस बार पेंशनर्स को भी बंपर तोहफा मिल सकता है। सरकार के पेंशनभोगी पोर्टल के अनुसार, 30 अक्टूबर, 2025 तक, 68.72 लाख पेंशनभोगी हैं। आइए जानते हैं कि पेंशनर्स को नए वेतन आयोग से क्या तोहफा मिल सकता है।
पेंशन वृद्धि में फिटमेंट फैक्टर का रोल होगा अहम
सरकारी रिटायर कर्मचारियों का मुख्य सहार पेंशन है। अब जब सरकार नए वेतन आयोग को लागू करने जा रही है तो सभी के मन में यही सवाल है कि उनकी पेंशन में कितनी वृद्धि होगी। आपको बता दें कि पेंशन में कितनी वृद्धि होगी, यह तय करने में फिटमेंट फैक्टर अहम भूमिका निभाएगा। वेतन आयोग में वेतन और पेंशन वृद्धि के लिए फिटमेंट फैक्टर एक गुणक के रूप में कार्य करता है। सातवें वेतन आयोग के लिए, फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिसका अर्थ है कि छठे वेतन आयोग में सरकारी कर्मचारियों का मूल वेतन उनकी मूल पेंशन की तुलना में 2.57 गुना बढ़ गया। आठवें वेतन आयोग के लिए, फिटमेंट फैक्टर का पता केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा वेतन आयोग की सिफारिशों पर मुहर लगाने के बाद चलेगा।
उदाहरण से समझते हैं कितनी बढ़ सकती है पेंशन
अधिकांश सरकारी कर्मचारियों को अंतिम बेसिक वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता है (पुरानी पेंशन योजना – OPS के तहत)।
नई वेतन आयोग की सिफारिश के बाद बेसिक पे पर फिटमेंट फैक्टर लगाया जाता है, और उसके आधार पर वेतन तय होता है। फिर पेंशन = उस वेतन पे का 50%।
उदाहरण के लिए, सातवें वेतन आयोग (CPC) के तहत, फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। अगर मूल वेतन 20,000 रुपये था, तो नए मैट्रिक्स में यह 51,400 रुपये हो गया।
- पेंशनभोगियों के पेंशन = वेतन का 50%।
- मान लेते हैं कि रमेश का बेसिक पे: 40,000 रुपये
- पेंशन (पुराने मूल वेतन का 50%): 20,000 रुपये
- फिटमेंट फैक्टर 2.57 पर
- 20000 × 2.57 = 51,400 रुपये
आठवें वेतन आयोग में ₹25,000 की पेंशन ₹50,000 कैसे हो सकती है?
अगर फिटमेंट फैक्टर 2 तय किया जाता है, तो नए वेतन आयोग में मूल पेंशन ₹50,000 तक बढ़ सकती है।
₹25,000X2 = ₹50,000।
उदाहरण और गणना
| मौजूदा पेंशन (₹) | फिटमेंट फैक्टर | अनुमानित नई पेंशन (₹) | वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|
| 25,000 | 2.0 | 50,000 | 100 |
| 20,000 | 2.57 | 51,400 | 157 |
| 30,000 | 3.0 | 90,000 | 200 |
पेंशन में होगी बढ़ोतरी
1.83 से 2.86 तक होने की चर्चा
फिटमेंट फैक्टर (मल्टीप्लायर) 1.83 से 2.86 तक होने की चर्चा है, जिससे पेंशन में औसतन 30-50% या इससे अधिक बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के लिए, ₹25,000 की मौजूदा पेंशन ₹50,000 तक दोगुनी हो सकती है। वर्तमान न्यूनतम पेंशन ₹9,000 के आसपास है, लेकिन पेंशनर्स संगठनों की मांग के अनुसार यह ₹25,000 तक बढ़ सकती है। यह विषय विवादास्पद है, क्योंकि आर्थिक स्थितियां और राजकोषीय सावधानी इसमें बाधा डाल सकती हैं।
