देश की अधिकतम बिजली मांग अगले साल 300 गीगावाट तक पहुंच सकती है, जिसका मुख्य कारण डेटा सेंटर, कृत्रिम मेधा (एआई) और इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से विस्तार है। केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को यह अनुमान जताया। केंद्रीय मंत्री ने यहां आयोजित 12वें ’इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक 2026’ कार्यक्रम में कहा कि भारत पहले ही अधिकतम बिजली मांग के मामले में 271 गीगावाट के करीब पहुंच चुका है और इस वर्ष इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है।
अगले साल देशभर में बिजली की खपत बढ़ सकती है।(फोटो क्रेडिट-iStock)
बिजली मंत्रालय के अनुसार, इस साल मई महीने में देश में बिजली की सबसे ज्यादा मांग 270.82 गीगावाट रही, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। बिजली मंत्री ने बताया कि फिलहाल देश में 284 गीगावाट बिजली बनाने की क्षमता है, जिससे लोगों की जरूरत पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिजली की मांग और बढ़ने वाली है, क्योंकि तेजी से विद्युतीकरण हो रहा है। इसलिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी करना जरूरी है।
बिजली की बढ़ रही है मांग
उन्होंने कहा कि देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा को सुरक्षित रखने (स्टोर करने) की व्यवस्था अब देश की एक बड़ी जरूरत बन गई है। इससे जब बिजली की जरूरत हो, तब पहले से बनाई गई बिजली का इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने बताया कि पहले बिजली बनते ही तुरंत इस्तेमाल हो जाती थी, क्योंकि उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने की अच्छी व्यवस्था नहीं थी। लेकिन अब आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीक और बेहतर बिजली ग्रिड की मदद से बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय उपयोग किया जा सकता है।
'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' पर जोर
उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य (नेट-जीरो) कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में गैर-जीवाश्म ईंधन (जैसे सौर, पवन और जल ऊर्जा) से बिजली उत्पादन की क्षमता 81 गीगावाट से बढ़कर 291 गीगावाट हो गई है, जो स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही उन्होंने 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान पर जोर देते हुए कहा कि भारत को सौर सेल, बैटरी और उनसे जुड़े अन्य उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इससे देश में उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की मजबूती भी बढ़ेगी।
(इनपुट-भाषा)
