Economic Survey 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2022-23 का इकोनॉमिक सर्वे पेश कर दिया है। सर्वे में साल 2022-23 के लिए भारत की 7.0 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया गया है। वहीं अगले वित्त वर्ष (2023-24) के लिए 6 से 6.8 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है। वहीं नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट के आधार पर 11 फीसदी का अनुमान जताया है। सर्वे के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से ग्रोथ करने वाली इकोनॉमी बनी रहेगी। सर्वे में यह दावा किया गया है कि भारत ने असाधारण आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के मामले में दुनिया के अधिकतर देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
जानें कैसे रहेगी भारत की आर्थिक तस्वीर
तीन साल में सबसे कम ग्रोथ रेट
इकोनॉमिक सर्वे में साल 2023-24 के लिए 6.5 फीसदी ग्रोथ रेट का अनुमान जताया गया है। जो कि पिछले 3 साल में सबसे कम ग्रोथ रेट होगी। पिछले साल के इकोनॉमिक सर्वे में 2022-23 के दौरान देश की जीडीपी विकास दर 8-8.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। लेकिन वैश्विक परिस्थितियों की वजह से इकोनॉमी उस लक्ष्य से नहीं बढ़ पाई है।
विभिन्न एजेंसियों का ग्रोथ अनुमान
| एजेंसी | ग्रोथ का अनुमान (2022-23) |
| इकोनॉमिक सर्वे | 7% |
| भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) | 6.8% |
| विश्व बैंक | 6.9% |
| IMF | 6.8% (2023) |
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष के दौरानमहंगाई दर 6.8 फीसदी रहेगी। वहीं सर्वे में यह दावा भी किया गया है कि महंगाई की यह दर इतनी अधिक नहीं है, जिससे प्राइवेट खपत घट जाए या इनवेस्टमेंट पर इसका बुरा असर पड़े।
महामारी से उबरी इकोनॉमी, बेरोजगारी कम हुई
इस बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि अब हमे महामारी से उबरने की बात नहीं करनी चाहिए। अब उससे आगे बढ़ना होगा। बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार हुआ है और उनकी क्रेडिट ग्रोथ बढ़ रही है। जुलाई सितंबर 2019 में बेरोजगारी दर 8.3% से घटकर जुलाई-सितंबर 2022 में 7.2% हुई। सर्वे के अनुसार EPFO के आंकड़े भी रोजगार क्षेत्र में सुधार की गवाही दे रहे हैं। सर्वे के अनुसार श्रम बाजार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में, सुधर कर कोविड के पूर्व के स्तर से आगे आ चुके हैं।
रुपये की कैसी रहेगी चाल
सर्वे में कहा गया है कि घरेलू मांग में मजबूती के कारण इंपोर्ट बिल बढ़ने के आसार हैं। ऐसे में अगर चालू खाता घाटा (CAD)में इजाफा हुआ तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अभी रूपया डॉलर के मुकाबले करीब 81 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। सर्वे के अनुसार वैश्विक ग्रोथ रेट धीमी पड़ने से ग्लोबल ट्रेड में गिरावट का असर मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान देश के एक्सपोर्ट पर हुआ है। ऐसे में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए पैकेज का भी ऐलान हो सकता है। इस बात का संकेत इकोनॉमिक सर्वे में दिया गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त
इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। सर्वे के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान केंद्र सरकार 7.5 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल खर्च (CAPEX) का लक्ष्य पूरा कर लेगी। इसकी वजह से प्राइवेट इनवेस्टमेंट में भी तेजी नजर आने लगी है। इस साल के पहले 8 महीनों के दौरान केंद्र सरकार के कैपेक्स में सालाना आधार पर 63.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसने देश की इकॉनमी के लिए ग्रोथ ड्राइवर का काम किया है।
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— ANI (@ANI) Jan 31, 2023
रिकॉर्ड स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन
साल 2021-22 में भारत में कुल अनाज उत्पादन रिकॉर्ड 315.7 मिलियन टन तक पहुंच गया। इसके अलावा प्रथम अग्रिम अनुमान 2022-23 (केवल खरीद) के अनुसार देश में कुल अनाज उत्पादन का अनुमान 149.9 मिलियन टन है जो पिछले पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के औसत खरीद अनाज उत्पादन से भी ज्यादा है। दालों का उत्पादन भी पिछले पांच वर्षों के औसत 23.8 मिलियन टन से बहुत अधिक रहा है।
मोदी बोले ऐसा होगा बजट
संसद के बजट सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए, पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आम बजट का उद्देश्य आम आदमी की इच्छाओं को पूरा करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भारत को एक ब्राइट स्पॉट के रूप में देख रही है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट 2023 उस दिशा में ही पेश होगा।
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