सोना हमेशा से भारतीयों की सबसे पसंदीदा सेविंग ऑप्शन रहा है। लोग इसे तिजोरी या लॉकर में सुरक्षित रखकर भूल जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही सोना आपको चुपचाप कमाई भी करवा सकता है? जी हां, घर पर रखा आपका गोल्ड सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक ऐसे बैंकिंग नियम के तहत पैसे में बदला जा सकता है, जिसके बारे में 99% लोग अनजान हैं। यही ट्रिक आपके सोने को सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि कमाई का जरिया भी बना सकती है।
बैंक लॉकर लेने के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट और उससे जुड़ी शर्तें अक्सर लोगों को परेशान करती हैं। खासकर बड़े शहरों में लॉकर पाना आसान नहीं होता और कई बार बैंक इसके बदले में एफडी या इंश्योरेंस जैसे प्रोडक्ट लेने की शर्त भी रख देते हैं। ऐसे में एक्सपर्ट्स मानते हैं कि गोल्ड ओवरड्राफ्ट (OD) सुविधा लॉकर के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और किफायती विकल्प साबित हो सकती है।
क्या है गोल्ड ओवरड्राफ्ट?
गोल्ड ओवरड्राफ्ट एक खास बैंकिंग सुविधा है, जिसमें आप अपनी सोने की ज्वेलरी बैंक को सिक्योरिटी के रूप में जमा करते हैं। इसके बदले बैंक आपको एक ओवरड्राफ्ट लिमिट देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पर ब्याज केवल तभी देना होता है, जब आप इसका उपयोग करते हैं। यानी सोना बेचे बिना आपको जरूरत पड़ने पर कैश की सुविधा मिल जाती है। अगर आप पैसा इस्तेमाल ही नहीं करते, तो ब्याज भी नहीं देना पड़ता। हां, प्रोसेसिंग फीस, स्टाम्प ड्यूटी और मूल्यांकन शुल्क जरूर चुकाना होता है।
गोल्ड ओडी कैसे काम करता है?
गोल्ड ओवरड्राफ्ट (Gold OD) सुविधा में आपको सबसे पहले बैंक में एक ओवरड्राफ्ट खाता खुलवाना होता है। इस खाते की खासियत यह है कि जितनी राशि आप इस्तेमाल करेंगे, सिर्फ उसी पर ब्याज देना होगा, जबकि खाते में पड़ी बाकी रकम पर कोई ब्याज नहीं लगता। आपका सोना बैंक के वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाता है और उसके आधार पर आपको ओवरड्राफ्ट लिमिट दी जाती है। हालांकि, इसमें कुछ खामियां भी हैं। सभी बैंक यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराते, इसलिए कई बार छोटे बैंकों का रुख करना पड़ता है। चूंकि यह एक लोन प्रोडक्ट है, अगर उधार ली गई राशि समय पर वापस नहीं चुकाई गई तो बैंक आपके सोने की नीलामी भी कर सकता है। इसके अलावा, कुछ बैंक गोल्ड लोन की तुलना में इस सुविधा पर लगभग 1% ज्यादा ब्याज भी वसूलते हैं।
लॉकर Vs गोल्ड ओडी
लॉकर में रखा सोना पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता और न ही उसका पूरा बीमा होता है। RBI के नियमों के मुताबिक बैंक सिर्फ लॉकर किराए के 100 गुना तक ही मुआवजा देते हैं। उदाहरण के लिए, अगर सालाना रेंट ₹5,000 है, तो अधिकतम ₹5 लाख तक का ही मुआवजा मिलेगा, भले ही आपके लॉकर में उससे कहीं ज्यादा सोना रखा हो। वहीं, गोल्ड ओडी में बैंक आपके सोने की असली वैल्यू जानता है और उसे पूरी सुरक्षा देता है।
बैंक लॉकर में क्या होंगे नुकसान
बैंक लॉकर की सबसे बड़ी खामी यह है कि उसकी सुरक्षा की गारंटी सीमित होती है। चोरी, आग, फर्जीवाड़ा या बैंक स्टाफ की गलती से हुए नुकसान की भरपाई तक ही बैंक जिम्मेदार होता है, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं जैसी स्थितियों में कोई गारंटी नहीं होती। इसके अलावा, लॉकर लेने के लिए बैंक अक्सर एफडी या इंश्योरेंस जैसी शर्तें भी जोड़ देते हैं, जो ग्राहकों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित होती हैं। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि घर पर रखा सोना सिर्फ सुरक्षित ही न रहे, बल्कि आपके लिए कमाई का जरिया भी बने, तो गोल्ड ओवरड्राफ्ट एक स्मार्ट और फायदेमंद विकल्प हो सकता है।
