क्यों भारत से बाहर भी तलाशने चाहिए निवेश विकल्प, देविना मेहरा ने बताईं 3 वजह

Devina Mehra
Expert view: Devina Mehra

अगर आपने कभी भारत के बाहर निवेश के बारे में विचार नहीं किया है, तो आप खुद ही अपने पैसे को बढ़ने से रोक रहे हैं। क्योंकि, जब निवेश की बात आती है, तो डायवर्सिफिकेशन विकल्प नहीं जरूरत है।

भारतीय निवेशकों के लिए सिर्फ घरेलू बाजार पर निर्भर रहना हमेशा फायदेमंद नहीं हो सकता। First Global की फाउंडर दिग्गज निवेशक देविना मेहरा ने एक उदाहरण के जरिए बताया कि लंबे समय में ग्लोबल निवेश को नजरअंदाज करने से संपत्ति में बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। उनके मुताबिक, ₹1 लाख की रकम एक स्थिति में करीब ₹1.5 करोड़ बनती, जबकि बेहतर ग्लोबल एक्सपोजर के साथ यही रकम ₹6.8 करोड़ तक पहुंच सकती थी। सवाल सिर्फ रिटर्न का नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में विविधता का भी है।

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ग्लोबल इन्वेस्टिंग जरूरी

1. सिर्फ भारत में निवेश से बढ़ा सकता है रिस्क

देविना मेहरा के मुताबिक किसी एक देश के बाजार पर ज्यादा निर्भरता निवेशक के जोखिम को बढ़ा सकती है। भारतीय शेयर बाजार में भी कुछ खास सेक्टर और चुनिंदा बड़ी कंपनियों का दबदबा रहता है। ऐसे में अगर किसी समय इन कंपनियों या सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहता है तो पूरे पोर्टफोलियो पर इसका असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों को दूसरे देशों और अलग-अलग बाजारों में भी निवेश के विकल्प तलाशने चाहिए। इससे किसी एक अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर पूरी तरह निर्भरता कम की जा सकती है।

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