पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी भले ही युद्ध विराम चल रहा है। लेकिन, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई बुरी तरह लड़खड़ाई हुई है। हालांकि, फिलहाल दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर चल रही बातचीत ने इस स्थिति के जल्द खत्म होने की उम्मीद जगाई है। लेकिन, अगर बातचीत कामयाब नहीं रहती है और पूरे साल होर्मुज स्ट्रेट बंद रहे, तो दुनिया का महामंदी में जाना तय है। यह दावा किया है ग्लोबल एनर्जी रिसर्च फर्म वुड मैकेन्जी ने, और साथ ही कहा है कि यह स्थिति रही, तो क्रूड ऑयल का दाम 200 डॉलर प्रति बैरल के एतिहासिक स्तर पर पहुंच जाएगा।
क्रूड के दाम पूरी दुनिया में बढ़ाएंगे महंगाई
Wood Mackenzie की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे अहम ऑयल सप्लाई रूट को Hormuz Strait को बंद रखने से पूरी दुनिया इस सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इस रास्ते के और लंबे समय तक बंद होने की स्थिति में क्रूड की कीमतें मौजूदा स्तर से दोगुनी से भी ज्यादा होकर $200 प्रति बैरल के करीब पहुंच सकती हैं। जाहिर तौर पर यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक महामंदी में धकेल देगा।
क्यों बदतर हो सकते हैं हालात?
मैकेन्जी के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक अगर यह संघर्ष इस साल के आखिर तक जारी रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अफरातफरी बढ़ेगी। चूंकि, सामान्य तौर पर यहां से हर दिन निकलने वाला 1.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार में नहीं आ पाएगा। दुनिया का दूसरा कोई भी स्रोत बहुत जल्दी इतनी आपूर्ति नहीं बढ़ा सकता है। इसके अलावा एलएनजी (LNG) संकट भी बढ़ेगा। क्योंकि, यहां से सालाना 80 मिलियन टन से अधिक एलएनजी की सप्लाई रुक जाएगी, जो पूरी दुनिया के कुल एलएनजी व्यापार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा है।
ताबूत में आखिरी कील होगा डीजल
क्रूड के दाम बढ़ेंगे, तो जाहिर तौर पर पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ेंगे। रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक डीजल और जेट फ्यूल का दाम $300 प्रति बैरल के पार तक जा सकता है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में मालभाड़ा और हवाई सफर आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा।
3 संभावनाओं पर टिकी क्रूड की चाल
इस संकट का असर कितना गहरा होगा, इसे समझने के लिए मैकिन्जी की रिपोर्ट में तीन परिस्थितियां बताई गई हैं।
1. क्विक पीस : यदि जून 2026 तक कोई व्यावहारिक शांति समझौता हो जाता है और यह रास्ता खुल जाता है, तो बाजार जल्द संभल जाएगा। इस स्थिति में ब्रेंट क्रूड साल 2026 के अंत तक $80 और 2027 में $65 प्रति बैरल तक नीचे आ सकता है।
2. सितंबर तक तनाव : अगर बातचीत लंबी खिंचती है और सितंबर तक सप्लाई बाधित रहती है, तो ईंधन की किल्लत के चलते साल 2026 की दूसरी छमाही में वैश्विक जीडीपी ग्रोथ घटकर 2% से नीचे रह जाएगी, जिससे दुनिया एक हल्की मंदी की चपेट में आएगी।
3. साल के अंत तक पाबंदी : यह सबसे खतरनाक स्थिति है। अगर सैन्य तनाव के चलते साल 2026 के अंत तक होर्मुज का रास्ता बंद रहता है, तो ईंधन की भारी कमी से ब्रेंट क्रूड $200 प्रति बैरल के स्तर को छू लेगा। इससे वैश्विक जीडीपी में 0.4% की गिरावट आएगी और पूरी दुनिया में भारी महामंदी छा जाएगी।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% क्रूड ऑयल आयात करता है, ऐसे में तेल बाजार का यह उबाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
भारतीय रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (Crisil) ने भी इस पर चिंता जताई है। क्रिसिल के मुताबिक, क्रूड सप्लाई में बाधा के चलते वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भारत के व्यापार घाटे बड़ा इजाफा हो सकता है। एजेंसी का अनुमान है कि इस दौरान ब्रेंट क्रूड $90 से $95 प्रति बैरल के बीच बना रह सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष के $70.3 के औसत से काफी ज्यादा है। इसके चलते भारत में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।
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