Consumer Staples Growth : कंज्यूमर स्टेपल्स यानी रोजमर्रा के उपयोग वाले पैक्ड फूड, ड्रिंक्स और जरूरी सामानों का सेक्टर 2026 (FMCG sector) की दूसरी छमाही में धीरे-धीरे सामान्य ग्रोथ की तरफ लौट सकता है। ब्रोकरेज फर्म Systematix Institutional Equities की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में मिले टैक्स और GST से जुड़े फायदों का असर धीरे-धीरे खत्म होने लगेगा। साथ ही पिछले साल के ऊंचे बेस की वजह से इस बार ग्रोथ की रफ्तार धीमी दिख सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेक्टर का कुल आउटलुक अभी भी संतुलित है, लेकिन तेज उछाल की उम्मीद कम है।
कंज्यूमर स्टेपल्स सेक्टर की ग्रोथ 2026 के दूसरे हिस्से में सामान्य होने की संभावना (तस्वीर-ANI)
डिस्ट्रीब्यूशन और चैनल में बदलाव
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक मैदानी स्तर पर यानी दुकानदारों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कंपनियां पहले की तुलना में ज्यादा कुशल तरीके से स्टॉक मैनेज कर रही हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स का इन्वेंट्री होल्डिंग अब 12–15 दिन से घटकर करीब 7–10 दिन रह गया है। इसका मतलब है कि सामान कम समय के लिए गोदाम में रखा जा रहा है और सप्लाई ज्यादा तेजी से दुकानों तक पहुंच रही है। इससे वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम हुआ है और स्टॉक खत्म होने की समस्या भी कुछ हद तक सुधरी है। हालांकि, बिक्री लक्ष्य अभी भी कई क्षेत्रों में दोहरे अंकों (मिड-टीन्स ग्रोथ) के आसपास रखे जा रहे हैं, यानी कंपनियां अभी भी आक्रामक बिक्री लक्ष्य बना रही हैं।
डिमांड के रुझान
डिमांड के मामले में तस्वीर मिश्रित है। कुछ प्रोडक्ट कैटेगरी जैसे चॉकलेट, कॉफी और नूडल्स में अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है, खासकर उत्तर भारत में। वहीं बड़े पैक वाले प्रोडक्ट्स पर ऑनलाइन सस्ते दामों की वजह से दबाव बना हुआ है। इंफैंट न्यूट्रिशन यानी बच्चों के पोषण उत्पादों में उत्तर और पश्चिम भारत में सुधार देखा गया है। लेकिन प्रतिस्पर्धा अभी भी काफी ज्यादा है।
कीमतें और टैक्स वाले प्रोडक्ट्स का असर
टैक्स वाले प्रोडक्ट्स में कीमत बढ़ने का सीधा असर मांग पर पड़ रहा है। कई जगह उपभोक्ता अब सस्ते विकल्प की तरफ जा रहे हैं या छोटे पैक खरीद रहे हैं। इससे डाउनट्रेडिंग यानी कम कीमत वाले विकल्पों की तरफ शिफ्टिंग बढ़ी है। डिस्ट्रीब्यूशन लेवल पर बिक्री थोड़ी कमजोर दिख रही है क्योंकि कंपनियों ने पहले से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा था। अब वह सामान्य स्तर पर आ रहा है। एंड कंज्यूमर डिमांड में भी मिड-सिंगल डिजिट गिरावट देखी गई है। एक चिंता की बात यह है कि अवैध (इल्लीगल) प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ रही है, जो लगभग 40% सस्ते मिलते हैं। इससे वैध कंपनियों की ग्रोथ पर दबाव बन सकता है।
सॉफ्ट ड्रिंक और नई कंपनियों की स्थिति
सॉफ्ट ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है। बड़ी कंपनियों की बिक्री 10–20% तक बढ़ रही है, जबकि नई कंपनियां 40–50% तक तेजी दिखा रही हैं। इसका कारण बेहतर प्राइस-पैक रणनीति और मजबूत सप्लाई नेटवर्क है। कुछ इलाकों में डिस्ट्रीब्यूशन बंडलिंग यानी एक साथ कई प्रोडक्ट्स बेचने की रणनीति कम हो रही है, लेकिन उत्तर भारत में यह अभी भी जारी है। पानी (वॉटर) और एनर्जी ड्रिंक में भी अच्छी मांग है, खासकर अलग-अलग पैक साइज के कारण। हालांकि सप्लाई में कुछ इलाकों में दिक्कतें बनी हुई हैं।
आगे का दृष्टिकोण
कुल मिलाकर सेक्टर का आउटलुक स्थिर लेकिन सीमित ग्रोथ वाला दिख रहा है। जैसे-जैसे GST और अन्य एकमुश्त फायदे खत्म होंगे, वैसे-वैसे ग्रोथ धीमी हो सकती है। बड़ी कंपनियों के कुछ लोकप्रिय प्रोडक्ट्स जैसे मैगी की ग्रोथ भी अब सामान्य स्तर पर आ सकती है। हालांकि, जो कंपनियां कम कीमत वाले नए प्रोडक्ट लॉन्च करेंगी, सप्लाई चेन को मजबूत रखेंगी और इनोवेशन पर ध्यान देंगी, वे इस धीमी ग्रोथ वाले माहौल में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
