Share Market Performance in 2025 (शेयर बाजार का 2025 में प्रदर्शन) बेहद निराशाजक रहा। FII/FPI की तरफ से पिछले पूरे वर्ष लगातार बिकवाली हुई। भले ही DII ने जमकर खरीद की, लेकिन आखिर में पूरे साल का हिसाब लगाएं, तो FII नेट सेलर रहे और कुल 1.66 लाख करोड़ की बिकवाली की गई। इसकी वजह से बाजार का ओवरऑल सेंटिमेंट नरम ही रहा। फिलहाल, Budget 2026 से पहले सरकार ने इस मसले पर ध्यान दिया है। ET Now की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ऐसे विकल्पों पर विचार कर रही है, जिससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश भारत में ज्यादा आसानी से आ सकें। माना जा रहा है कि इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला बजट के नजदीक लिया जाएगा।
बजट 2026 में राहत संभव (इमेज क्रेडिट, ओपन एआई)
लॉन्ग टर्म पेंशन फंड को टैक्स छूट
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार एक अहम विकल्प पर विचार कर रही है, जिसके तहत लॉन्ग टर्म पेंशन और एंडोवमेंट फंड्स को इक्विटी लिस्टिंग्स में टैक्स-फ्री ट्रीटमेंट दिया जा सकता है। वजह साफ है, कई बड़े ग्लोबल फंंडअपने देश में टैक्स फ्री होते हैं और भारत में भी उसी तरह का टैक्स ट्रीटमेंट चाहते हैं, ताकि भारत में उनकी लॉन्ग टर्म और लगातार निवेश रणनीति आसान हो सके। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पेंशन फंड्स और सॉवरेन वेल्थ फंड्स (SWFs) को फिलहाल इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(23FE) के तहत कुछ मामलों में टैक्स छूट मिलती है। लेकिन, सरकार इस सिस्टम को और ज्यादा इन्वेस्टर फ्रेंडली बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को भारत लॉन्ग टर्म के लिए ज्यादा आकर्षक लगे।
STT कटौती पर विचार
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के Capital market की दक्षता को बढ़ाने और बाजार को लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा अपीलिंग बनाने के लिए STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स घटाने पर भी विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश सेग्मेंट में STT फिलहाल डेरिवेटिव्ज की तुलना में ज्यादा है और बाजार भागीदार लंबे समय से इसे तर्कसंगत बनाने की मांग करते रहे हैं। अगर Budget 2026 में कैश सेग्मेंट में STT में कटौती होती है, तो इससे ट्रेडिंग कॉस्ट कम हो सकती है, लिक्विडिटी बढ़ सकती है। इसके अलावा बाजार भागीदारी में भी सुधार दिख सकता है।
बाजार लिए क्यों अहम हैं ये कदम
बाजार भागीदार मानते हैं कि विदेशी निवेश का स्थिर इनफ्लो शेयर बाजार के मोमेंटम को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। खासतौर पर ऐसे समय में जब ग्लोबल लिक्विडिटी और जोखिम की स्थिति तेजी से बदल रही है। सरकार अगर टैक्स कम कर ट्रांजैक्शन कॉस्ट घटाती है, तो इससे भारतीय बाजार ज्यादा प्रेडिक्टेबल और आकर्षक बन सकता है। खासकर पेंशन फंड्स और और एंडोवमेंट फंड्स के लिए भारत में आना आसान हो जाएगा।
बजट से पहले आया संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक इन उपायों पर अभी बातचीत हो रही है। सरकार का मकसद मार्केट मोमेंटम को पुश देना है, लेकिन सरकार राजकोषीय हितों से भी समझौता नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि इस मामले में फिलहाल कोई ऐलान नहीं किया गया है।
