नई दिल्ली। 1 फरवरी 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) आगामी वित्त वर्ष यानी 2023-24 के लिए देश का आम बजट (Union Budget) पेश करेंगी। बजट 2023 (Budget 2023) की तैयारियां तेज हो गई हैं। एविएशन सेक्टर से लेकर रियल एस्टेट सेक्टर तक, हर किसी को इस बार के बजट से काफी उम्मीदें हैं। सरकार भी सभी उद्योगों की मांगें सुन रही है। इस बीच खबर आ रही है कि इस बात लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
क्या है कैपिटल गेन टैक्स?
आपने कैपिटल गेन टैक्स के बारे में कई बार सुना होगा। सरकार की ओर से निवेशकों पर कई तरह के टैक्स लगाए जाते हैं, कैपिटल गेन टैक्स भी उन्हीं का एक हिस्सा है। यह किसी पूंजी की बिक्री पर होने वाले मुनाफे पर वसूला जाता है। इस प्रॉफिट को सरकार इनकम का ही एक हिस्सा मानती है।
एलटीसीजी पर लिया जा सकता है फैसला
सरकार 2023-24 के आगामी केंद्रीय बजट में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) कर ढांचे को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर सकती है। अभी तक एक वर्ष से अधिक के लिए रखे गए शेयरों पर 10 प्रतिशत एलटीसीजी कर लगता है। इस कर को 2005 में बंद कर दिया गया था, लेकिन 2018 में उस वित्त वर्ष के केंद्रीय बजट में इसे फिर से पेश किया गया था।
मंत्रालय कर रहा है विचार
घटनाक्रम से वाकिफ सूत्रों ने कहा कि समझा जाता है कि वित्त मंत्रालय एलटीसीजी (Long Term Capital Gains) कर ढांचे को युक्तिसंगत बनाकर और यहां तक कि मुद्रास्फीति (Inflation) समायोजित पूंजीगत लाभ की गणना के लिए आधार वर्ष को संशोधित करके समान परिसंपत्ति वर्गो के बीच समानता सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है।
अचल संपत्ति और असूचीबद्ध शेयरों की बिक्री से लाभ जो दो साल से अधिक समय से आयोजित हैं, 20 प्रतिशत एलटीसीजी को आकर्षित करते हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार आगामी बजट में कर दरों को युक्तिसंगत बनाने और एलटीसीजी की गणना के लिए होल्डिंग अवधि पर विचार कर सकती है।
(एजेंसी इनपुट्स के साथ)
