$110 से $115 पहुंचा ब्रेंट क्रूड ऑयल, केवल 1 डॉलर की तेजी से कैसे हिल जाता है भारत का बजट?

इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड का भाव 115 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है। भारत जरूरत का 85% तक तेल आयात करता है। लेकिन क्रूड के भाव में अगर 1 डॉलर का उछाल आता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना बड़ा असर होता है क्या आप जानते हैं? अगर नहीं तो आइए बताते हैं...

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग लगा दी है। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच चुका है, जो भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि कच्चे तेल में होने वाली महज 1 डॉलर की बढ़ोतरी भी देश की पूरी इकोनॉमी का गणित बिगाड़ देती है।

Crude Oil Prices

अगर कच्चा तेल सिर्फ 1 डॉलर प्रति बैरल भी महंगा होता है, तो भारत का सालाना आयात बिल (Import Bill) लगभग 2 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाता है। महंगे तेल का सीधा प्रहार देश की महंगाई दर पर होता है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो क्रूड की कीमतों में 10% के उछाल से रिटेल महंगाई (CPI) में 40 bps और थोक महंगाई (WPI) में 80 bps की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके साथ ही, देश का चालू खाता घाटा (CAD) भी 30 bps तक बढ़ जाता है, जो भारतीय रुपये और सरकारी खजाने पर भारी दबाव डालता है।

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