Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Explained: क्या है ब्लू इकोनॉमी, विकसित भारत के निर्माण में इतनी खास क्यों?

Blue Economy Explained: ब्लू इकोनॉमी यानी नीली अर्थव्यवस्था का अर्थ समुद्री संसाधनों, मछली पालन, बंदरगाहों, पोत निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा का पर्यावरण-अनुकूल इस्तेमाल कर भारत के आर्थिक और समावेशी विकास को गति देना है।

Image
ब्लू इकोनॉमी: समुद्र की गहराई में छिपा विकसित भारत का सुनहरा भविष्य (तस्वीर-AI)
Authored by: रामानुज सिंह
Updated Sep 24, 2026, 13:52 IST
Follow on Google News

Blue Economy Explained : जब हम भारत के नक्शे को देखते हैं, तो नीचे का पूरा हिस्सा तीन ओर से नीले समुद्र से घिरा नजर आता है। भारत के पास करीब 7,500 किलोमीटर लंबी खूबसूरत तटरेखा और 20 लाख वर्ग किलोमीटर से भी बड़ा विशाल समुद्री क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) है। समुद्र के इस विशाल भंडार, उसकी लहरों, मछलियों, खनिजों और वहां से होने वाले व्यापार का इस्तेमाल करके देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना ही 'ब्लू इकोनॉमी' या 'नीली अर्थव्यवस्था' कहलाता है। जिस तरह जमीन पर खेती, उद्योग और व्यापार होते हैं, ठीक वैसे ही समुद्र के भीतर छिपे खजाने और समुद्री रास्तों का सही इस्तेमाल करके भारत खुद को एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नीली अर्थव्यवस्था का मतलब क्या है?

आसान शब्दों में कहें तो नीली अर्थव्यवस्था का मतलब सिर्फ समुद्र से मछली पकड़ना नहीं है। इसका दायरा बहुत बड़ा है। इसमें समुद्र के रास्ते जहाजों से सामान का आयात-निर्यात करना, नए और आधुनिक बंदरगाह बनाना, समुद्र के भीतर छिपे तेल, गैस और कीमती खनिजों की खोज करना, लहरों से बिजली बनाना और तटीय इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा समुद्र में उगने वाली विशेष घासों (सीवीड) से दवाइयां और उत्पाद बनाना भी इसी का हिस्सा है। भारत सरकार का लक्ष्य केवल समुद्र का दोहन करना नहीं है, बल्कि उसके पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए देश की प्रगति के लिए उसका सही इस्तेमाल करना है।

भारत की नीली अर्थव्यवस्था को नया रूप देने वाले बड़े कदम

भारत सरकार ने समुद्र से जुड़े उद्योगों को नया जीवन देने के लिए कई बड़े और आधुनिक कदम उठाए हैं:-

  • सागरमाला परियोजना और आधुनिक बंदरगाह:- भारत के बंदरगाहों को स्मार्ट बनाया जा रहा है। जहाजों का काम तेजी से हो सके, इसके लिए डिजिटल सिस्टम और नए तरीके अपनाए गए हैं। अब जहाजों को सामान उतारने और चढ़ाने में एक दिन से भी कम समय लगता है। केरल के विझिंजम में एक बहुत गहरा प्राकृतिक बंदरगाह तैयार किया गया है, जिससे बड़े-बड़े मालवाहक जहाज सीधे भारत आ सकेंगे।
  • जहाज निर्माण और समुद्री कोष:- सरकार भारत में ही नए जहाज बनाने और उनकी मरम्मत करने के लिए 'समुद्री विकास कोष' बना रही है। इससे विदेशी जहाजों पर हमारी निर्भरता कम होगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • मत्स्य पालन में क्रांति:- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के जरिए मछुआरों को आधुनिक नावें, बर्फ के डिब्बे और क्रेडिट कार्ड दिए जा रहे हैं। आज भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, जिससे करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है।
  • गहरे समुद्र में खोज (डीप ओशन मिशन):- भारत समुद्र की अगाध गहराइयों में छिपे खजाने को खोजने के लिए 'समुद्रयान' परियोजना पर काम कर रहा है। इसके तहत 'मत्स्य-6000' नाम की एक स्वदेशी पनडुब्बी बनाई गई है, जो वैज्ञानिकों को समुद्र के 6,000 मीटर नीचे ले जाकर अनुसंधान करने में मदद करेगी। वहां तांबा, निकेल और कोबाल्ट जैसे बहुमूल्य खनिज मौजूद हैं।
  • समुद्री ऊर्जा और समुद्री घास:- तमिलनाडु और गुजरात के तटों पर समुद्र की तेज हवाओं से बिजली (अपतटीय पवन ऊर्जा) बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही, तटीय क्षेत्रों में महिलाओं के समूहों द्वारा समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका उपयोग खाद्य पदार्थों और दवाइयों में होता है।
Blue Economy क्यों जरूरी (तस्वीर-AI)

Blue Economy क्यों जरूरी (तस्वीर-AI)

पर्यावरण की रक्षा और ब्लू कार्बन का महत्व

समुद्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के साथ-साथ तटीय पर्यावरण की सुरक्षा भी बहुत जरूरी है। सरकार 'मिष्टी' (MISHTI) योजना के तहत तटीय इलाकों में मैंग्रोव (सदाबहार तटीय वन) के पौधे लगा रही है। मैंग्रोव के जंगल केवल समुद्री जीवन को बचाते ही नहीं हैं, बल्कि ये खतरनाक समुद्री तूफानों और सुनामी की लहरों से तटों की रक्षा भी करते हैं। मैंग्रोव के पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने में आम पेड़ों से कई गुना ज्यादा असरदार होते हैं, जिसे 'ब्लू कार्बन' कहा जाता है। इसके अलावा, भारत के कई समुद्र तटों को अंतरराष्ट्रीय 'ब्लू फ्लैग' प्रमाणन मिला है, जो वहां की स्वच्छता और बेहतर पर्यावरण को दर्शाता है।

नीली अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियां

समुद्री संसाधनों का उपयोग करने के रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हैं:-

  • समुद्री प्रदूषण:- शहरों का गंदा पानी, कारखानों का कचरा और प्लास्टिक समुद्र में बहकर जा रहा है। हाल के सालों में जहाजों से तेल रिसने की घटनाओं और समुद्र में फेंके गए प्लास्टिक के जालों ने समुद्री जीवों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
  • जलवायु परिवर्तन और गर्म होता समुद्र:- ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिंद महासागर का तापमान बढ़ रहा है। इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों का कटाव हो रहा है और प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) नष्ट हो रही हैं।
  • पारंपरिक मछुआरों की समस्याएं:- बड़ी-बड़ी मशीनीकृत ट्रॉलर नावों द्वारा जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ने के कारण तटीय इलाकों में मछलियों की संख्या कम हो रही है। इससे अपनी छोटी नावों से पारंपरिक तरीके से जीवन यापन करने वाले छोटे मछुआरों की आजीविका पर संकट आ गया है।
  • विदेशी जहाजों पर निर्भरता:- भारत का ज्यादातर व्यापार विदेशी झंडे वाले जहाजों से होता है। इससे भारत को हर साल अरबों डॉलर का किराया विदेशी कंपनियों को चुकाना पड़ता है।

सतत विकास और सुरक्षा का संतुलन

ब्लू इकोनॉमी को सही मायने में सफल बनाने के लिए हमें केवल समुद्र से साधन निकालने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि समुद्र के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना होगा।

  1. सबसे पहले, हमें देश स्तर पर एक 'समुद्री स्थानिक योजना' (Marine Spatial Planning) बनानी होगी, जिससे यह तय हो सके कि समुद्र के किस हिस्से में जहाज चलेंगे, कहां मछली पकड़ी जाएगी और कौन सा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
  2. दूसरा, तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। किसी भी नई बंदरगाह या पर्यटन परियोजना को शुरू करने से पहले स्थानीय लोगों की सलाह और उनकी आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  3. तीसरा, समुद्र में फेंके जाने वाले कचरे और प्लास्टिक पर सख्त रोक लगानी होगी। साथ ही, प्रदूषण न फैलाने वाले हरित जहाजों (Green Ships) और स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा।

भारत के लिए नीली अर्थव्यवस्था केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे करोड़ों मछुआरों के जीवन को बेहतर बनाने और देश की ऊर्जा जरुरतों को पूरा करने का एक सुनहरा अवसर है। अगर हम विज्ञान, आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक संतुलन को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे, तो यह 'नीली क्रांति' वर्ष 2047 तक भारत को एक समृद्ध, सक्षम और विकसित राष्ट्र बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

End of Article