क्रिप्टो मार्केट में हलचल तेज है और बिटकॉइन फिर से सुर्खियों में है लेकिन इस बार नई ऊंचाइयों के लिए नहीं, बल्कि बड़े क्रैश के लिए। साल की शुरुआत में जब बिटकॉइन लगातार रिकॉर्ड बना रहा था, तब लग रहा था कि इसकी रफ्तार अब किसी से नहीं रुकेगी। लेकिन कुछ ही दिनों में हालात ऐसे बदले कि बिटकॉइन की चमक फीकी पड़ गई। ट्रंप के टैरिफ बयान से लेकर बड़े निवेशकों की अचानक दूरी… कई वजहों ने मिलकर दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी को जोरदार झटका दिया है। आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि आखिर क्यों क्रिप्टोकरेंसी टूट रही है?
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेज गिरावट का दौर जारी है और इसका सबसे बड़ा असर बिटकॉइन पर देखा जा रहा है। साल की शुरुआत में बिटकॉइन में 30% से ज्यादा तेजी आई थी, लेकिन अब यह पूरा फायदा मिट गया है। ट्रंप प्रशासन की क्रिप्टो को लेकर सकारात्मक उम्मीदें भी अब कमज़ोर होने लगी हैं। शुरुआती गिरावट का कारण कई निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा उम्मीद से कम ब्याज दरें बनाए रखने को बताया, लेकिन इसके पीछे कई और बड़ी वजहें भी हैं।
कितना गिरा बिटकॉइन?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को बिटकॉइन की कीमत गिरकर $93,714 से नीचे आ गई, जो पिछले साल के अंत में बंद हुई कीमत से भी कम है। सिर्फ कुछ हफ्ते पहले, 6 अक्टूबर को बिटकॉइन $126,251 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन ट्रंप की अचानक टैरिफ संबंधी बयानों ने वैश्विक बाजारों को झटका दिया और इसके बाद बिटकॉइन की कीमत लगातार फिसलती चली गई। सोमवार सुबह 10 बजे के करीब यह लगभग $94,869 पर ट्रेड कर रहा था।
क्यों टूट रहा है बिटकॉइन?
पिछले एक महीने में बड़े निवेशक जैसे ETF फंड और बड़ी कंपनियों की ट्रेज़रीबिटकॉइन की खरीद से पीछे हट गए हैं। साल की शुरुआत में इन्हीं निवेशकों ने बिटकॉइन को मजबूत सपोर्ट देकर कीमत को ऊपर पहुंचाया था। लेकिन अब इनकी कम गतिविधि से बाजार में कमजोरी बढ़ गई है। इसके साथ ही टेक शेयरों की गिरावट ने भी निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा को काफी कम कर दिया है।
इस साल बिटकॉइन में कई उतार-चढ़ाव देखे गए। अप्रैल में ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद बिटकॉइन करीब $74,400 तक गिर गया था, लेकिन बाद में यह रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, 10 अक्टूबर को ट्रंप की अचानक टैरिफ घोषणा के बाद भारी बिकवाली हुई, जिसने पूरे क्रिप्टो बाजार को झकझोर दिया। इसके बाद से बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी स्थिर होने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
