Banking Liquidity : देश की बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त नकदी (लिक्विडिटी) तेजी से घटकर लगभग तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार नकदी बढ़ाने के लिए कदम उठा रहा है, लेकिन कंपनियों और कारोबारियों द्वारा अग्रिम कर (एडवांस टैक्स) भुगतान किए जाने के कारण बैंकिंग प्रणाली से बड़ी मात्रा में धन बाहर निकल गया है। इसका असर बैंकों के पास उपलब्ध अतिरिक्त नकदी पर साफ दिखाई दे रहा है।
आरबीआई के प्रयासों के बावजूद नकदी में आई कमी
17 जून को अतिरिक्त नकदी घटकर 4,772 करोड़ रुपये रह गई
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 17 जून 2026 को बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी केवल 4,772.21 करोड़ रुपये रह गई। इससे एक दिन पहले यानी 16 जून को यह राशि 23,881.21 करोड़ रुपये थी। सिर्फ एक दिन में अतिरिक्त नकदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह स्तर 22 मार्च 2026 के बाद सबसे कम माना जा रहा है। उस समय बैंकिंग प्रणाली में 65,395.64 करोड़ रुपये की नकदी की कमी दर्ज की गई थी। मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि बैंकिंग क्षेत्र में नकदी का दबाव बढ़ रहा है और बैंकों के लिए धन की उपलब्धता पहले की तुलना में कम हो गई है।
अग्रिम टैक्स भुगतान बना मुख्य वजह
बाजार एक्सपर्ट्स का कहना है कि नकदी में आई इस कमी की सबसे बड़ी वजह अग्रिम कर भुगतान है। हर तिमाही में कंपनियां और बड़े करदाता सरकार को अग्रिम कर जमा करते हैं। जब यह भुगतान किया जाता है तो बड़ी मात्रा में धन बैंकों से निकलकर सरकारी खातों में चला जाता है। इससे बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध नकदी घट जाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जून तिमाही के अग्रिम कर भुगतान के चलते बैंकिंग प्रणाली से पर्याप्त धन बाहर गया है, जिससे लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ा है। हालांकि यह स्थिति आमतौर पर अस्थायी होती है, लेकिन इससे अल्पावधि में बैंकों की नकदी स्थिति प्रभावित हो सकती है।
नकदी की कमी से बढ़ीं बाजार ब्याज दरें
बैंकिंग प्रणाली में नकदी कम होने का असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। नकदी की स्थिति सख्त होने के कारण भारित औसत कॉल मनी दर (Weighted Average Call Money Rate) बढ़कर आरबीआई की रेपो दर 5.25 प्रतिशत से ऊपर चली गई है। कॉल मनी दर वह ब्याज दर होती है जिस पर बैंक एक-दूसरे से बहुत कम अवधि, आमतौर पर एक दिन के लिए, धन उधार लेते हैं। जब बैंकिंग प्रणाली में नकदी पर्याप्त होती है तो यह दर सामान्य रूप से रेपो दर के आसपास रहती है। लेकिन नकदी की कमी होने पर बैंकों को धन जुटाने के लिए अधिक ब्याज देना पड़ता है, जिससे यह दर बढ़ जाती है।
आरबीआई ने वीआरआर नीलामियों के जरिए डाली नकदी
नकदी की कमी को दूर करने और बाजार में ब्याज दरों को नियंत्रित रखने के लिए आरबीआई ने हाल के दिनों में कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने परिवर्ती रेपो दर (Variable Rate Repo-VRR) नीलामियों के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में बड़ी मात्रा में अस्थायी नकदी उपलब्ध कराई है। पिछले कुछ दिनों में आरबीआई ने विभिन्न अवधि की वीआरआर नीलामियों के जरिए करीब 1.89 लाख करोड़ रुपये की नकदी बैंकिंग प्रणाली में डाली है। इसका उद्देश्य बैंकों को पर्याप्त धन उपलब्ध कराना और अल्पकालिक ब्याज दरों पर दबाव कम करना है।
अलग-अलग नीलामियों से डाली गई बड़ी राशि
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 18 जून को दो वीआरआर नीलामियों के माध्यम से 72,300 करोड़ रुपये बैंकिंग प्रणाली में डाले गए। इससे पहले 16 जून को सात दिन की वीआरआर नीलामी के जरिए 89,440 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराई गई थी। वहीं 15 जून को आयोजित ओवरनाइट वीआरआर नीलामी के माध्यम से 28,220 करोड़ रुपये बैंकों को उपलब्ध कराए गए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में नकदी पर दबाव बना रहता है तो आरबीआई और अधिक वीआरआर नीलामियां आयोजित कर सकता है। इससे बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहेगी और मुद्रा बाजार में ब्याज दरों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
आगे क्या रहेगी स्थिति
बाजार जानकारों का कहना है कि अग्रिम कर भुगतान का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने के बाद बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति सुधर सकती है। हालांकि फिलहाल आरबीआई की नजर लिक्विडिटी की स्थिति पर बनी हुई है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक अतिरिक्त उपायों के जरिए बाजार में नकदी उपलब्ध कराता रहेगा ताकि बैंकिंग प्रणाली सुचारू रूप से काम करती रहे और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनी रहे।
