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नवरात्रि में फ्लैट बुक करने जा रहे, ब्रोकर नहीं देंगे ये 6 अहम जानकारी, बुकिंग से पहले ऐसे करें पता, रहेंगे टेंशन फ्री

बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की बारीकियों की जानकारी आमतौर पर ब्रोकर Home Buyers को नहीं देते हैं। इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सौदे के नियम व शर्तों को किसी वकील से मिलकर समझ लेना चाहिए। इससे बाद में परेशानी नहीं होती है।

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घर की खरीदारी
Authored by: Alok Kumr
Updated Sep 28, 2025, 10:52 IST
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Navratiri 2025: नवरात्रि के दौरान फ्लैट बुक करना काफी शुभ माना जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में लोग अपने सपने का आशियाना बुक करते हैं। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो फ्लैट बुक करने जा रहे हैं तो आंख मूंदकर प्रॉपर्टी ब्रोकर पर भरोसा नहीं करें। प्रॉपर्टी ब्रोकर अक्सर घर खरीदारों से कई बातें छुपाते हैं। रियल एस्टेट जानकारों का कहना है कि रियल एस्टेट में घर की खरीद में प्रॉपर्टी ब्रोकर का काफी अहम रोल है। हालांकि, बहुत सारे प्रॉपर्टी ब्रोकर कमीशन के चक्कर में होम बायर्स को सही जानकारी नहीं देते या छुपा लेते हैं। बाद में होम बायर्स के पास पछताने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। इसलिए फ्लैट बुक करने से पहले प्रॉपर्टी ब्रोकर से कुछ सवाल पूछना बिल्कुल नहीं भूलें। साथ ही खुद से रिसर्च जरूर करें। हम आपको उन सवालों के बारे में बता रहे हैं, जो आप प्रॉपर्टी ब्रोकर से पूछ कर सही जानकारी हासिल कर सकते हैं। अगर आप ऐसा करेंगे तो प्रॉपर्टी की खरीद के बाद टेंशन फ्री रहेंगे और अच्छी बचत भी भी कर पाएंगे।

1. ओवर ऑल कास्ट की जानकारी छुपा लेते हैं ब्रोकर

फ्लैट की बुकिंग में खरीदारों को आकर्षित करने के लिए आम तौर पर प्रॉपर्टी ब्रोकर फ्लैट का बेस प्राइस बताते हैं। इससे प्रॉपर्टी की कीमत कम लगती है। होम बायर्स द्वारा कम कीमत को देखते हुए बुकिंग कर ली जाती है। उसके बाद में कई तरह के चार्ज बिल्डर द्वारा लगा दिए जाते हैं। इससे बोझ बढ़ जाता है। इसलिए ब्रोकर से पार्किंग चार्ज, मेंटेनेंस डिपॉजिट, सोसाइटी मूव-इन शुल्क, PLC, पेमेंट का शेड्यूल, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस आदि का खर्च पूछें। ब्रोकर से साफ-साफ पूछें कि फ्लैट की बुल लागत कितनी आएगी। अगर ब्रोकर नहीं बता पता है तो बिल्डर से ये जानकारी लें। इससे आपको बजट बनाने में आसानी होगी और बाद में परेशानी नहीं होगी।

2. मार्केट वैल्यू और रीसेल का पोटेंशियल नहीं बताते

ब्रोकर से प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू और रीसेल पोटेंशियल को लेकर सवाल जरूर करें। आप जिस प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कर रहे हैं, उसमें कितनी यूनिट्स अब भी अनसोल्ड हैं? किस तरह के खरीदार इस प्रोजेक्ट में निवेश कर रहे हैं? इसके अलावा आप जिस एरिया में फ्लैट बुक करने जा रहे हैं, वहां पर कोई नया डेवलपमेंट वर्क जैसे रोड, मॉल, पार्क आदि बन रहा है। ये सारी जानकारी जरूर लें। इससे आपको उस प्रॉपर्टी की सही कीमत और आने वाले समय में एप्रिसिएशन की सही जानकारी मिल पाएगी।

3. बिल्डर बायर एग्रीमेंट की जानकारी पूरी नहीं देते

बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की बारीकियों की जानकारी आमतौर पर ब्रोकर खरीदार को नहीं देते हैं। इस एग्रीमेंट में बिल्डर ने कौन से नियम व शर्तें डाल दी हैं? खरीदार को क्‍या अधिकार हैं ऐसे बहुत सी बातों की जानकारी ब्रोकर खरीदारों से छिपा जाते हैं। इसलिए प्रॉपर्टी खरीदने से पहले सौदे के नियम व शर्तों को किसी वकील से मिलकर समझ लेना चाहिए। अगर आप ऐसा करेंगे तो आप अपने अधिकार को समझ पाएंगे। साथ ही सही प्रॉपर्टी खरीद पाएंगे। बिल्डर या ब्रोकर बुकिंग के बाद भी आपसे चलाकी नहीं कर पाएगा।

इन खर्चों की जानकारी जरूर लें

  • रजिस्ट्री फीस: कई बार यह फीस प्रॉपर्टी की कीमत का 1-2% तक हो सकती है।
  • स्टांप ड्यूटी: यह भी राज्य के अनुसार बदलती रहती है।
  • मेंटेनेंस खर्च: प्रॉपर्टी बुक करने से पहले मेंटेनेंस खर्च का आकलन करना जरूरी है।

इन बातों का रखें ख्याल

  1. एआई तकनीक: ब्रोकर मौजूदा समय में प्रॉपर्टी की स्थिति को बेहतर दिखाने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बचने के लिए प्रॉपर्टी का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करें।
  2. बिल्डर की विश्वसनीयता: बिल्डर की पिछली परियोजनाओं की समीक्षा करें और RERA (Real Estate Regulatory Authority) से प्रोजेक्ट की स्थिति की जानकारी प्राप्त करें।
  3. प्रॉपर्टी के आसपास का माहौल: ब्रोकर कभी-कभी प्रॉपर्टी के आसपास के माहौल या भविष्य के विकास के बारे में पूरी जानकारी नहीं देते।खुद से प्रॉपर्टी के आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करें और भविष्य के विकास योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
  4. कानूनी स्थिति: ब्रोकर प्रॉपर्टी के कानूनी दस्तावेजों की सही जानकारी नहीं देते। वकील से मिलकर जानकारी लें। इतना ही नहीं, प्रॉपर्टी का टाईटल डीड, रजिस्ट्री रिकॉर्ड, बिल्डर से संबंधित सभी परमिशन और NOC की जानकारी जरूर लें।

4. कब मिलेगा पजेशन, इसका जवाब देने से बचते हैं!

अगर आप अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कर रहे हैं तो ब्रोकर या बिल्डर से यह जानकारी जरूर लें कि पजेशन कब मिलेगा? समय पर निर्माण पूरा न होना और पजेशन में देरी रियलिटी मार्केट की बड़ी समस्‍या है। प्रॉपर्टी बेचते वक्‍त बिल्‍डर और ब्रोकर जल्‍द निर्माण पूरा होने और तमाम सुविधाएं मुहैया कराने के सब्‍जबाग दिखाते हैं जबकि असल में इन वादों पर बहुत कम लोग खरा उतरते हैं। समय पर पजेशन नहीं देने के लिए बिल्डर कई तरह के कारण गिनाते हैं। इसलिए निवेश से पहले बिल्डर का रिकॉर्ड जरूर चेक करें। उसके पुराने प्रोजेक्‍ट में रह रहे लोगों से इस बारे में जानकारी लेनी चाहिए। अगर समय पर बिल्डर पजेशन नहीं देता है तो पेनल्टी कितना देगा। ये जानकारी जरूर भी जुटाएं।

होम बायर्स

होम बायर्स

5. सैंपल फ्लैट का सब्जबाग दिखाते हैं!

खरीदारों को आकर्षित करने के लिए बिल्‍डर आकर्षक सैंपल फ्लैट तैयार करते हैं। ब्रोकर इसी सैंपल फ्लैट को दिखकर फ्लैट बेचते हैं। हालांकि, कई बार सैंपल फ्लैट और बेचे गए फ्लैट की कंस्‍ट्रक्‍शन क्‍वालिटी और इंटीरियल में काफी फर्क होता है। सैंपल फ्लैट को स्‍पेसियस दिखाने के लिए दीवार की मोटाई रियल फ्लैट की तुलना में पतली होती है। सैंपल फ्लैट को कांच से विभाजन किया जाता है और फर्नीचर छोटा रखा जाता है। इससे फ्लैट स्‍पेसियस दिखता है। हालांकि, रियल फ्लैट ऐसा नहीं होता है। इसलिए सैंपल फ्लैट पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करें।

6. कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की जानकारी नहीं देते

किसी भी प्रोजेक्ट की निर्माण गुणवत्ता के बारे में ब्रोकर आपको अक्सर जानकारी नहीं देते। इसे जानने के लिए आपको खुद रिसर्च करनी होगी। पुराने प्रोजेक्ट्स के अनुभव और समीक्षा देखकर आप बिल्डर की क्वालिटी का अंदाजा लगा सकते हैं। यदि आप जिस प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने जा रहे हैं वह रेडी-टू-मूव है, तो वहां रहने वाले लोगों से सीधे निर्माण गुणवत्ता के बारे में पूछकर भी सही जानकारी मिल सकती है।

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