भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) में विस्तार को लेकर चल रही बाजार की अटकलों पर विराम लगाते हुए अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) ने स्पष्ट किया है कि वह एयरलाइन कारोबार में प्रवेश करने की किसी भी योजना पर विचार नहीं कर रही है। हाल ही में मीडिया रिपोर्टों और बाजार में ऐसी चर्चाएं तेजी से फैल रही थीं कि अडानी समूह (Adani Group) जल्द ही देश में अपनी खुद की एयरलाइन सेवा शुरू कर सकता है। इन खबरों का खंडन करते हुए कंपनी ने शेयर बाजारों को दी गई अपनी नियामकीय फाइलिंग (Regulatory Filing) में साफ तौर पर कहा कि एयरलाइन शुरू करने से जुड़ी सभी खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद, भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसके पास फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और न ही समूह एयरलाइन ऑपरेशन के क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी कर रहा है।
अडानी की एविएशन इंडस्ट्री को 'नो',
रिपोर्ट्स को किया खारिज
अडानी समूह की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब देश के एविएशन सेक्टर में हवाईअड्डा संचालकों और एयरलाइंस के बीच हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर बहस छिड़ गई थी। इंडिगो के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने हाल ही में बयान दिया था कि यदि एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनियों को एयरलाइन चलाने की अनुमति दी जाती है, तो इससे मार्केट में हितों का बड़ा टकराव पैदा हो सकता है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना था कि उनका इशारा सीधे तौर पर अडानी समूह की ओर ही था। गौरतलब है कि अडानी समूह अपनी सहायक कंपनी 'अडानी एयरपोर्ट्स होल्डिंग्स' के जरिए वर्तमान में देश के आठ प्रमुख हवाईअड्डों का संचालन करता है और भारत के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में एक प्रमुख खिलाड़ी है।भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट्स में से एक है, जहां एयरलाइंस के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। वर्तमान में भारतीय विमानन बाजार पर इंडिगो (InterGlobe Aviation) का दबदबा है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 65.4 प्रतिशत है। इसके बाद टाटा समूह की एयर इंडिया लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। ऐसे में यदि कोई नया बड़ा समूह इस सेक्टर में उतरता, तो बाजार के समीकरण बदल सकते थे, लेकिन अडानी एंटरप्राइजेज के इस बयान ने सभी तरह की संभावनाओं पर पूर्णविराम लगा दिया है।
तेजी से बढ़ रहा है सेक्टर
दूसरी ओर, केंद्र सरकार देश में लगातार बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को देखते हुए एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2047 तक देश में हवाई अड्डों की संख्या को बढ़ाकर 350 से 400 तक पहुंचाया जाए, जो वर्ष 2014 में मात्र 74 थी। हवाई यात्रियों की बढ़ती संख्या और भारतीय एयरलाइंस द्वारा बोइंग और एयरबस जैसी दिग्गज कंपनियों को दिए जा रहे रिकॉर्ड विमानों के ऑर्डर को देखते हुए एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार बेहद अहम माना जा रहा है। अडानी समूह का ध्यान भी फिलहाल एयरलाइन चलाने के बजाय देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने पर ही केंद्रित है।
