DSR टेक्नोलॉजी: चावल की खेती में क्रांति, पानी की बचत और लागत में भारी कमी

Direct Seeded Rice DSR Technology: सीनियर सरकारी अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रत्यक्ष धानबीज रोपाई (डीएसआर) तकनीक कई राज्यों में सफल परिणाम दिखा रही है। इसे अपनाने से भारत के धान उत्पादन वाले लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र में इसका इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने भूजल संकट को ध्यान में रखते हुए जल-कुशल और टिकाऊ खेती प्रणालियों को तुरंत अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Direct Seeded Rice DSR Technology: सीनियर सरकारी अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि प्रत्यक्ष धानबीज रोपाई (डीएसआर) तकनीक भारत में चावल की खेती के लिए एक बड़ी क्रांति साबित हो सकती है। यह तकनीक कई राज्यों में अच्छे नतीजे दिखा रही है और इसके पूरी तरह अपनाने से देश के धान उत्पादन वाले लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र को इसके दायरे में लाया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि जल संकट के बढ़ते खतरे के बीच जल-कुशल खेती के तरीकों को तुरंत अपनाना जरूरी है।

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डीएसआर तकनीक से चावल की खेती में सुधार की उम्मीद (तस्वीर-istock)

नई बीज और फसल सुरक्षा तकनीकें

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक डीएसआर पर हुए एक सम्मेलन में कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि को बदलने के लिए नई बीज तकनीक और फसल सुरक्षा से जुड़ी नई खोजें बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “हम नए बायोलॉजिकल उत्पादों, बेहतर फसल सुरक्षा रसायनों और अगली पीढ़ी की बीज तकनीक पर काम कर रहे हैं। इसमें संकर और जीन-संशोधित किस्में भी शामिल हैं। जब इन्हें बेहतर खेती की पद्धतियों के साथ मिलाया जाएगा, तो ये भारतीय कृषि को वास्तव में बदल सकती हैं और अधिक टिकाऊ खेती की ओर ले जा सकती हैं।

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