इस साम्पुटिक श्रीसूक्त का पाठ माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए किसी भी शुभ तिथि, वार नक्षत्र में 51, 101 बार पाठ किया जा सकता है. पाठ करने के पश्चात दशांश हवन भी करना चाहिए। हवन में बेल पत्री की समिधा (बेलपत्र की लकड़ी) और बेल के फल से (बेल के फल का पाउडर) बनाकर करना चाहिए.