Cuba Threat US: अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा ने कथित तौर पर 300 से ज्यादा सैन्य ड्रोन हासिल कर लिए हैं और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने जैसे संभावित विकल्पों पर चर्चा भी की है। यह जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसियों द्वारा साझा की गई गोपनीय रिपोर्ट्स के आधार पर सामने आई है।
अमेरिका पर हमले की तैयारी, इस देश ने खरीदे भारी संख्या में ड्रोन, रूस-यूक्रेन युद्ध ने बदली दुनिया की जंग
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह साफ किया है कि फिलहाल किसी तत्काल हमले की तैयारी के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन वॉशिंगटन में इसे एक बड़े सुरक्षा खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि क्यूबा में मौजूद ड्रोन क्षमता का इस्तेमाल भविष्य में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे, अमेरिकी सैन्य जहाजों और फ्लोरिडा के Key West जैसे इलाकों के खिलाफ किया जा सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका के बेहद करीब मौजूद एक छोटा देश अब ड्रोन युद्ध जैसी नई तकनीक की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि क्यूबा के रूस और ईरान के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों ने ट्रंप प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ड्रोन तकनीक अब सिर्फ बड़े देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि छोटे देश भी कम लागत में बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
आखिर क्यूबा की सैन्य ताकत कितनी है?
क्यूबा की सेना पारंपरिक हथियारों के मामले में दुनिया की बड़ी ताकतों में शामिल नहीं है। Global Firepower Index 2026 के अनुसार, क्यूबा की रैंक 65वीं है, जबकि US पहले स्थान पर है।
क्यूबा की सेना
क्यूबा के पास करीब 50 हजार सक्रिय सैनिक, 40 हजार रिजर्व सैनिक और 11 लाख से ज्यादा पैरामिलिट्री फोर्स है। उसकी रक्षा नीति 'War of All the People' पर आधारित है, यानी अगर हमला होता है तो पूरा देश लड़ाई में शामिल होगा।
हालांकि क्यूबा के अधिकांश हथियार पुराने सोवियत दौर के हैं। उसके पास T-54, T-55 और T-62 जैसे पुराने टैंक हैं, सीमित संख्या में MiG फाइटर जेट हैं और नौसेना भी मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा तक सीमित है। अमेरिका की तुलना में क्यूबा का सैन्य बजट बेहद छोटा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने कैसे बदल दिया ड्रोन युद्ध?
2026 की शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन हमलों की रफ्तार और जटिलता दोनों तेजी से बढ़ी हैं। अप्रैल 2026 को इस युद्ध में ड्रोन इस्तेमाल का अब तक का सबसे बड़ा चरण माना जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रूस ने सिर्फ अप्रैल महीने में यूक्रेन के खिलाफ 6,583 Shahed-type UAVs लॉन्च किए। इनमें से 4,335 ड्रोन Shahed/Geran स्ट्राइक ड्रोन थे, जिन्हें रूस के अलाबुगा प्लांट में तैयार किया गया था।
रूस की ओर से औसतन हर दिन 219 ड्रोन लॉन्च किए गए, जिनमें करीब 145 कमिकाज़े या स्ट्राइक ड्रोन शामिल थे। यह आंकड़ा मार्च 2026 के 208 ड्रोन प्रतिदिन और जुलाई 2025 के 203 ड्रोन प्रतिदिन के पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा है। इससे साफ है कि ड्रोन अब युद्ध का सबसे अहम हथियार बनते जा रहे हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रूस अब तक युद्ध के दौरान 57 हजार से ज्यादा Shahed-type कमिकाजे ड्रोन इस्तेमाल कर चुका है। दूसरी तरफ यूक्रेन भी तेजी से ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ा रहा है। अक्टूबर 2025 में यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया था कि उनकी सेना रोजाना करीब 9 हजार ड्रोन रूसी ठिकानों के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है।
अगर इस आंकड़े को मासिक स्तर पर देखें तो यूक्रेन को हर महीने लगभग 2.7 लाख ड्रोन की जरूरत पड़ती है। जबकि 2025 की शुरुआत तक उसकी घरेलू उत्पादन क्षमता करीब 2 लाख ड्रोन प्रति माह थी। यही वजह है कि NATO देशों और यूरोपीय संघ की मदद यूक्रेन के लिए बेहद अहम हो गई है। यूरोपीय संघ ने यूक्रेन की ड्रोन और रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए 6 अरब यूरो तक की सहायता योजना भी घोषित की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है कि भविष्य की लड़ाइयां अब सिर्फ मिसाइलों और टैंकों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे AI-सक्षम ड्रोन के जरिए भी लड़ी जाएंगी।
अमेरिका क्यों ज्यादा चिंतित है?
विशेषज्ञों का कहना है कि असली खतरा सिर्फ क्यूबा की मौजूदा ताकत नहीं, बल्कि उसकी लोकेशन है। क्यूबा अमेरिका के बेहद करीब है और अगर वहां ड्रोन नेटवर्क, विदेशी सलाहकार या नई तकनीक सक्रिय होती है, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा रणनीतिक खतरा बन सकता है। ट्रंप प्रशासन अब इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य के Drone Era Warfare की चेतावनी की तरह देख रहा है, जहां छोटे देश भी बड़ी ताकतों को चुनौती देने की क्षमता हासिल कर सकते हैं।
