New Bloc to emerge in Middle East : कच्चे तेल से समृद्ध मध्य पूर्व के मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बड़ा फैसला करते हुए मंगलवार को ईंधन निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से निकलने की घोषणा कर दी। यूएई ने अपने इस फैसले के पीछे व्यापारिक वजह बताई है। हालांकि, उसके इस फैसले से पेट्रोलियम निर्यातक कार्टेल को बड़ा झटका लगा है। खासकर सऊदी अरब को जो इस कार्टेल को नियंत्रित करता आया है। एक्सपर्ट की राय है कि यूएई के इस फैसले का असर सऊदी अरब के करीबी सहयोगी पाकिस्तान पर भी पड़ेगा।
मध्य पू्र्व में तेज होगी क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई
सऊदी अरब और यूएई के बीच तनातनी की एक बड़ी वजह क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई भी मानी जा रही है। यमन के एक हिस्से में दोनों देश वहां के अलग-अलग विरोधी चरमपंथी गुटों को अपना समर्थन देते आए हैं। यमन में इन गुटों का आपसी संघर्ष की वजह से सऊदी अरब और यूएई के रिश्ते में कड़वाहट आई। दूसरा, सऊदी अरब ने हाल के वर्षों में अपना तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में निवेश किया है। यह बात यूएई को पसंद नहीं आई। यूएई को लगता है कि ओपेक के जरिए सऊदी अरब चाहता है कि खाड़ी के देश अपने तेल का उत्पादन तो कम रखें लेकिन वह अपना तेल उत्पादन बढ़ाता रहे। यूएई इसके पक्ष में नहीं है। वह अपना तेल उत्पादन बढ़ाना चाहता है। ओपेक के देश जो तेल का उत्पादन कम करके कीमतें बढ़ाते थे, अब उनका यह मंसूबा शायद पूरा न हो पाए।
मध्य पू्र्व में UAE पर हुए ईरान के सबसे ज्यादा हमले
दूसरा रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यूएई चाहता था कि ईरान के हमले के बाद सऊदी अरब और कतर मिलकर तेहरान पर हमले करें लेकिन ये दोनों देश इसके लिए तैयार नहीं हुए। सऊदी अरब और कतर अमेरिका को ही ईरान पर हमले के लिए कहते रहे। यह बात भी यूएई को नागवार गुजरी क्योंकि खाड़ी देशों में ईरान के सबसे ज्यादा हमले यूएई ने झेली। इन हमलों में यूएई को भारी नुकसान पहुंचा।
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रिपोर्टों में कहा गया है कि सऊदी अरब की पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र के साथ नजदीकी भी यूएई को अखर रही है। यूएई को लगता है कि सऊदी अरब खाड़ी देशों से ज्यादा इन तीन मुल्कों के ज्यादा करीब जा रहा है। इसे वह एक नए ब्लॉक के रूप में भी देख रहा है।
PAK की 'तटस्थता' से UAE ने ठगा महसूस किया
ईरान युद्ध के दौरान यूएई को पाकिस्तान से उम्मीद थी कि वह उसके साथ खड़ा होगा लेकिन वह मध्यस्थ की भूमिका में आ गया। पाकिस्तान की कथित तटस्थता यूएई को रास नहीं आई और उसने इस्लामाबाद से अपने 3.5 अरब डॉलर मांग लिए। पैसा वापस करना पाकिस्तान की फितरत में शामिल नहीं है। आने वाले समय में यह भी हो सकता है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान की किसी बात पर नाराज हो जाए और वह भी उससे अपना पैसा मांग ले। दरअसल, युद्ध के दौरान पाकिस्तान की ईरान के प्रति तटस्थता और सऊदी अरब के लिए अपनी वायु सेना और सैनिकों को भेजा जाना भी उसे पसंद नहीं आया। यह तब है जब यूएई समय-समय पर पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता आया है। यही नहीं, यूएई में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी काम करते हैं। ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका से यूएई ने खुद को 'ठगा' हुआ महसूस किया है।
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इजराइल ने UAE में तैनात किए आयरन डोम
ईरान युद्ध मध्य पूर्व में देशों के बीच नया समीकरण तैयार करता दिख रहा है। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के हमलों से यूएई को बचाने के लिए इजराइल ने अपना एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम और कुछ सैनिक अबू धाबी भेजे। यह पहली बार है जब इजराइल ने अपना आयरन डोम किसी दूसरे देश में तैनात किया। अभी तक फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर खाड़ी के देश इजराइल से दूरी बनाकर रखते थे लेकिन अब इस यहूदी देश को लेकर उनमें स्वीकार्यता बढ़ रही है। यूएई जैसे खाड़ी के देश यदि इजराइल के करीब आते हैं तो क्षेत्र में यह एक नए भू-राजनीतिक समीकरण को जन्म देगा। इसे नए ब्लॉक के उभार में भी देखा जा रहा है।
