'भारत का FCRA विधेयक ईसाइयों पर सीधा हमला, द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा असर', बिफरे यूएस सांसद राइली मूर

राइले मूर ने कहा, यह ईसाइयों के खिलाफ एक सीधा हमला है। अगर यह विधेयक इसी तरह आगे बढ़ता है, तो यह अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में चिंता का एक बड़ा कारण बनेगा।

Riley Moore: अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राइली मूर (Riley Moore) ने भारत की संसद में प्रस्तुत विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) पर कड़ी आपत्ति जताई है। वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन सांसद मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि यह विधेयक भारत में ईसाइयों और उनके धार्मिक संगठनों को निशाना बनाने का प्रयास है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो इससे भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो सकता है।

Riley Moor

अमेरिकी सांसद राइले मूर

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने क्या कहा?

सांसद मूर ने भारत में ईसाई धर्म के प्राचीन इतिहास का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद सेंट थॉमस द एपोस्टल (St. Thomas the Apostle) मलाबार तट (केरल) पहुंचे थे और भारत में ईसाई धर्म का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। मूर ने आरोप लगाया, इस लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद FCRA नियमों में संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संगठनों का अधिग्रहण करने की अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने कहा, यह ईसाइयों के खिलाफ एक सीधा हमला है। अगर यह विधेयक इसी तरह आगे बढ़ता है, तो यह अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में चिंता का एक बड़ा कारण बनेगा।

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