मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने शनिवार (स्थानीय समयानुसार) को ईरान पर नए हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का जवाब देना है।
(X/@CENTCOM|फाइल फोटो)
ईरान पर अमेरिका के नए हवाई हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर शनिवार शाम 6 बजे (स्थानीय समयानुसार) ईरान में नए हवाई हमले किए गए। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की सैन्य गतिविधियों को कमजोर करना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का जवाब देना है।
जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत
CENTCOM के अनुसार, 17 जुलाई को जॉर्डन में ईरान द्वारा दागी गईं बैलिस्टिक मिसाइलों औरड्रोन हमलों के दौरान दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक सैनिक अभी भी लापता है। चार अन्य घायल सैनिकों का इलाज जॉर्डन के अस्पतालों में किया गया, जिन्हें अब छुट्टी दे दी गई है। कुछ मामूली रूप से घायल सैनिक वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं।
ईरान का दावा
ईरानी सेना ने कहा कि उसने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' (Operation Lightning) के 14वें चरण के तहत जॉर्डन और कुवैत में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ईरान के मुताबिक, जॉर्डन स्थित अमेरिका के 'अल-अजराक एयर बेस' पर ड्रोन से हमला कर वहां के फ्यूल स्टोरेज (ईंधन डिपो) को निशाना बनाया था। ईरान ने कुवैत में स्थित अमेरिकी सेना के अली अल-सलेम एयर बेस, अल-उदैरी कैंप के गोला-बारूद डिपो और अन्य सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए।
लगातार बढ़ रहा है तनाव
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका लगातार सातवीं रात ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो क्षेत्र में बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है।
