अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दरअसल, लेबनान में इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई से नाराज ईरान ने शनिवार को बड़ा कदम उठाते हुए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। हालांकि इस बंदी का असर उसकी अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता पर नहीं पड़ेगा। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने दावा किया है कि रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दोनों पक्षों के बीच वार्ता होगी।
अमेरिका-ईरान शांति समझौता। (फोटो- AI)
पाकिस्तान ने क्या कहा?
होर्मुज की दोबारा बंदी के बीच इस समझौते के प्रमुख मध्यस्थ पाकिस्तान ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत रविवार से स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक (Bürgenstock) में शुरू होगी। इन वार्ताओं में कतर भी मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
अमेरिका के शीर्ष वार्ताकार पहले से मौजूद
उधर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिका के प्रमुख वार्ताकार जैरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं और वार्ता की तकनीकी तैयारियों में जुटे हैं। वेंस ने कहा कि वह स्वयं भी अगले कुछ दिनों में स्विट्जरलैंड जाएंगे। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह की बातचीत में विभिन्न पक्षों के बीच तालमेल बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है।वेंस ने आगे कहा कि हम बातचीत की योजना तब बनाएंगे जब ईरानी सरकार के साथ-साथ कतरी और पाकिस्तानी सरकारों के मुख्य प्रतिनिधि वहां पहुंच जाएंगे। ऐसा कल भी हो सकता है,लेकिन ऐसी चीजें हमेशा थोड़ी बदलती रहती हैं। वेंस ने कहा कि आज (शनिवार) सुबह जेरेड और स्टीव से बात करने के बाद मुझे जो समझ आया,उसके मुताबिक सब कुछ ठीक चल रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद
इससे पहले, ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान में जारी हमलों और अमेरिका की "बदनीयती" तथा समझौते के उल्लंघन के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। बयान में चेतावनी दी गई कि यदि इजरायली सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो ईरान आगे और भी कड़े कदम उठा सकता है।बातचीत के लिए रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल
होर्मुज बंद करने की घोषणा के कुछ ही समय बाद ईरान के सरकारी प्रसारक ने बताया कि देश का वार्ता प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुका है। यह यात्रा शुक्रवार को प्रस्तावित थी, लेकिन क्षेत्रीय हालात के कारण टाल दी गई थी। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कर दिया कि यह यात्रा केवल अमेरिका को उसकी प्रतिबद्धताओं की याद दिलाने के लिए है।
उन्होंने कहा कि अंतिम परमाणु समझौते पर औपचारिक बातचीत तभी शुरू होगी जब अमेरिका पहले अपने वादों का पालन करेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो पूरा अंतरिम समझौता ही खतरे में पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद कुछ दिनों पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल दिया गया था,जिससे तेल परिवहन सामान्य होने लगा था। लेकिन अब ईरान द्वारा इसे फिर बंद किए जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।लेबनान में इजरायली हमलों में 16 लोगों की मौत
इस बीच दक्षिणी लेबनान में इजरायल के ताजा हवाई हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, नबातियेह शहर और आसपास के गांवों में कई इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं। सात लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मौजूदा युद्ध में अब तक मरने वालों की संख्या 4,000 से अधिक हो चुकी है।
संघर्ष विराम की कोशिशों को झटका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तीन महीने से ज़्यादा समय से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत करने वालों को शुक्रवार से स्विट्जरलैंड में चर्चा करनी थी। हालांकि, इज़राइल और लेबनान के बीच गोलीबारी के एक नए दौर के कारण इसमें देरी हुई।
अमेरिका-ईरान समझौते पर मंडराया संकट
मौजूदा घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यह समझौता मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दोबारा बातचीत शुरू कराने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के उद्देश्य से किया गया था। भले ही इजरायल और हिजबुल्ला इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन समझौते में लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई थी।
इजरायल हिजबुल्ला का है ये दावा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि जब तक इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में तैनात रहेगी। वहीं हिजबुल्ला का कहना है कि जब तक इजरायल लेबनान से पूरी तरह पीछे हटने की प्रतिबद्धता नहीं जताता, तब तक वह अपने हमले बंद नहीं करेगा। ईरान ने भी इसी शर्त का समर्थन किया है।
