Donald Trump: यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान की सत्ता की असली चाबी सेना के हाथ में है। सेना ही वहां की सर्वेसर्वा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब इस बात पर खुले तौर पर मुहर लगा दी है। अब्राहम अकार्ड में मुस्लिम देशों को शामिल होने के लिए उन्होंने वहां के राष्ट्राध्यक्षों के साथ बात की है। अपनी इस बातचीत के बारे में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रुथ सोशल पर विस्तार से बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि इस समझौते में शामिल होने के लिए उन्होंने मुस्लिम देशों को निमंत्रण दिया है और इसमें पाकिस्तान भी शामिल है। खास बात यह है कि ट्रंप ने इन मुस्लिम देशों के राष्ट्रपतियों एवं राष्ट्राध्यक्षों से बात की है लेकिन पाकिस्तान का जिक्र करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जगह फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का नाम लिया। यानी ट्रंप भी मानते हैं कि पाकिस्तान की सत्ता की ताकत प्रधानमंत्री शहबाज के हाथों में नहीं बल्कि मुनीर के हाथों में है।
अब्राहम अकॉर्ड में मुस्लिम देशों को शामिल करना चाहते हैं ट्रंप। तस्वीर-AI
शांति वार्ता 'अच्छी तरह से' आगे बढ़ रही है-ट्रंप
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के साथ शांति वार्ता 'अच्छी तरह से' आगे बढ़ रही है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान अपने सर्वोच्च नेता से परामर्श के लिए जिस जटिल संचार नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है, उसके चलते अंतिम फैसले में कुछ समय लग सकता है। ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थता कर रहे देशों को अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए, जो इजराइल और अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक एवं सुरक्षा संबंध स्थापित करने से संबंधित है। उन्होंने कहा कि ईरान का इस समझौते पर हस्ताक्षर करना सम्मान की बात होगी।
'अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें मुस्लिम देश'
ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका की ओर से इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बाद, इन सभी देशों के लिए यह अनिवार्य होना चाहिए कि वे कम से कम अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें।' हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर एक-दो देश के पास ऐसा न करने का कोई कारण हो तो इसे स्वीकार किया जा सकता है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के मध्यस्थों में से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन पहले ही अब्राहम समझौते पर दस्तखत कर चुके हैं। ट्रंप चाहते हैं कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन भी इस समझौते पर हस्ताक्षर करें।
समझौते की मौजूदा रूपरेखा पर सहमत ईरान-यूएस
इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई एक अज्ञात स्थान से काम कर रहे हैं, जिसका बाहरी दुनिया से बहुत सीमित संपर्क है। उन्होंने कहा कि खामेनेई से केवल संदेशवाहकों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, जब अमेरिका अपनी प्रस्तावित शर्तों का विवरण भेजता है, तो ईरानी अधिकारियों को उन्हें सर्वोच्च नेता तक पहुंचाने में समय लगता है, जिससे संभावित प्रतिक्रिया में देरी होती है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मसौदा समझौते की मौजूदा रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। इसके बाद ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है।
