अमेरिका और इजराइल द्वारा करज के पास स्थित ईरान का B1 पुल ध्वस्त करने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर ईरान को सीधी धमकी दी है।उन्होंने अपने बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने,तेल पर नियंत्रण करने और वैश्विक स्तर पर भारी मुनाफा कमाने की बात कही है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा कि हम आसानी से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलकर तेल निकाल सकते हैं और खूब धन कमा सकते हैं। हमें बस इसके लिए थोड़े और समय की जरूरत है। क्या इससे दुनिया को तेल का बड़ा भंडार नहीं मिल जाएगा? हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को कैसे खोलेगा।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया युद्ध की स्थिति में है और होर्मुज स्ट्रेट,जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है लगभग अवरुद्ध हो चुका है। इससे वैश्विक तेल कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा रहा है।
पहले भी कर चुके हैं दावा
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने यह दावा किया हो। वे हफ्तों से यह वादा कर रहे हैं कि अमेरिका जल्द ही जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा। एक महीने पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिकी नौसेना के जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग से तेल ले जाने वाले जहाजों के साथ जाएंगे। लेकिन अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह संकरे जलडमरूमध्य में धीमी गति से चलने वाले जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है, जहां उसके जहाज ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं।
किसी देश के खनिज संसाधनों को लेकर कानून क्या कहता है?
1962 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक अंतरराष्ट्रीय नियम बनाया था, जिसमें कहा गया कि तेल, गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधन उसी देश के होते हैं, जिसकी जमीन या समुद्र में वे पाए जाते हैं। इसका सीधा सा तात्पर्य यह है कि किसी दूसरे देश के तेल संसाधनों पर कोई बाहरी देश कब्जा नहीं कर सकता। UN प्रस्ताव में यह भी साफ लिखा है कि हर देश और उसके लोग अपने संसाधनों पर पूरा हक रखते हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल वे अपनी मर्जी और अपने फायदे के लिए कर सकते हैं। एक देश दूसरे देश के संसाधनों पर कब्जा नहीं कर सकता, यह अंतरराष्ट्रीय बराबरी और सम्मान के खिलाफ है।
ट्रंप क्या करते रहे हैं?
डोनाल्ड ट्रंप कई बार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका जिन देशों में सैन्य रूप से शामिल रहा है,जैसे इराक और वेनेजुएला उसे वहां का तेल ले लेना चाहिए। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यह अवैध है।
