पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ओमान की मध्यस्थता के जरिए ईरान की ओर से तनाव कम करने का संकेत मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं। इससे दोनों देशों के बीच रुकी हुई वार्ता फिर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।
ट्रंप ईरान से वार्ता को तैयार
ओमान की पहल,संघर्ष विराम की अपील
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने रविवार को अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की। ओमान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अलबुसैदी ने संघर्ष विराम और संवाद की वापसी की अपील दोहराई। बयान में कहा गया कि सभी पक्षों की वैध चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए।
ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने भी कथित तौर पर कहा कि ईरान “शांति चाहता है” और किसी भी गंभीर प्रयास के लिए तैयार है,जो तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने में मदद करे।
हमलों के बीच कूटनीति
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों के जवाब में लगातार दूसरे दिन भी हमले किए। ओमान, जो पहले दिन के हमलों में अपेक्षाकृत सुरक्षित रहा था, वहां के दुक्म बंदरगाह पर दो ईरानी ड्रोन गिरने की खबर है, जिसमें एक विदेशी कर्मचारी घायल हुआ। स्थिति की गंभीरता के बावजूद ओमान ने खुद को एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में सक्रिय बनाए रखा है।
क्या बोले ट्रंप
अटलांटिक मैगज़ीन को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान का नया नेतृत्व उनसे बात करना चाहता है और उन्होंने इस पर सहमति दे दी है। उन्होंने कहा,वे बात करना चाहते हैं और मैंने बात करने के लिए हामी भर दी है। उन्हें यह पहले कर लेना चाहिए था। जो करना था, वह व्यावहारिक और आसान था, लेकिन उन्होंने बहुत देर कर दी। हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत किस स्तर पर होगी और कब शुरू हो सकती है। ट्रंप ने कहा कि जिन लोगों से हम बातचीत कर रहे थे,उनमें से कई अब नहीं रहे। वह बड़ा हमला था। उन्हें पहले समझौता कर लेना चाहिए था। उन्होंने जरूरत से ज्यादा चालाकी दिखाने की कोशिश की।
ओमान की भूमिका क्यों अहम?
ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल संवाद का केंद्र रहा है। मस्कट में अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मेजबानी कर वह दोनों देशों के बीच पुल का काम करता रहा है। हाल के महीनों में जेनेवा में भी ओमान की मध्यस्थता से वार्ताएं चल रही थीं, जिनका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय स्थिरता पर सहमति बनाना था।
