युद्ध के बीच रूस में संसदीय चुनाव: व्लादिमीर पुतिन की पार्टी की जीत तय, लेकिन क्रेमलिन के सामने चुनौतियां भारी

यूक्रेन युद्ध के साढ़े चार साल बाद रूस में पहले संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। आर्थिक सुस्ती, ड्रोन हमलों और विपक्ष के दमन के बीच व्लादिमीर पुतिन की यूनाइटेड रशिया पार्टी का वर्चस्व कायम रहने का अनुमान है।

रूस में संसद के निचले सदन 'स्टेट ड्यूमा' के लिए तीन दिवसीय मतदान प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है। 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर किए गए आक्रमण के बाद यह पहला युद्धकालीन संसदीय चुनाव है। वैसे तो चुनावी परिणाम राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ताधारी पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' के पक्ष में रहने की पूरी संभावना है, लेकिन साढ़े चार साल से जारी युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के कारण इस बार क्रेमलिन के लिए स्थितियां बेहद संवेदनशील बनी हुई हैं।

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रूस में युद्ध के दौरान पहला ड्यूमा चुनाव

ड्रोन हमले, ईंधन संकट और अर्थव्यवस्था पर असर

यूक्रेन द्वारा हाल के महीनों में किए गए लंबी दूरी के ड्रोन हमलों ने युद्ध की आंच को रूसी नागरिकों के दरवाजे तक पहुंचा दिया है। रूसी तेल रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने देश में ईंधन का गंभीर संकट पैदा कर दिया, जो जून से अगस्त के दौरान अपने चरम पर रहा। ऑनलाइन रिटेल दिग्गज 'वाइल्डबेरीज' (Wildberries) और 'ओजोन' (Ozon) के गोदामों पर हमलों से सैकड़ों-हजारों विक्रेताओं का सामान नष्ट हो गया, जिससे अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा। रक्षा बजट में भारी वृद्धि के बाद अब रूसी अर्थव्यवस्था मंदी और ठहराव की ओर बढ़ रही है। बढ़ते बजटीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कर बढ़ा दिए हैं और घरेलू कर्ज में वृद्धि की है। रूस की संस्था लेवाडा सेंटर (Levada Center) के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन की लोकप्रियता दर सितंबर 2025 के 87% से घटकर 76% पर आ गई है, जो जनता में बढ़ रही घबराहट को दर्शाती है।

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