भूकंप की तीव्रता जितनी ज्यादा होती है और वह समुद्र तट के जितने करीब होता है, सुनामी का खतरा भी उतना ही ज्यादा होता है। रूस के कमचटका में आज यानी बुधवार 30 जुलाई को आए 8.8 तीव्रता के भीषण भूकंप के बाद रूस, चीन, जापान और अमेरिका सहित प्रशांत महासागर से जुड़े कई देशों में सुनामी की लहरें देखी गईं। सुनामी की ऊंची-ऊंची लहरें स्थानीय लोगों में दहशत फैला रही हैं। हालांकि, जापान में काफी लोगों को खतरे से दूर ले जाया गया है। लेकिन क्या कभी आपके मन में यह प्रश्न नहीं आया कि आखिर भूकंप के घंटों बाद सुनामी की ऊंची-ऊंची लहरें क्यों आती हैं। चलिए जानते हैं -
सुनामी की लहरें समुद्र तट पर कितनी देर में पहुंचती हैं? (Photo - iStock)
रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में आए भूकंप के बाद तमाम देशों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। शुरुआत में जापान सहित कई देशों में 30 सेंटीमीटर की लहरें देखी गईं, लेकिन धीरे-धीरे इनकी ऊंचाई बढ़ती चली गई। सुनामी की लहरें समुद्र तट तक कब या कितनी देर में पहुंचेंगी यह अलग-अलग कारणों पर निर्भर करता है। जिनमें भूकंप की तीव्रता, भूकंप का सेंटर, भूकंप की गहराई जैसे कारण शामिल हैं। कभी-कभी सुनामी की छोटी लहरें 15-20 मिनट में ही नजदीकी समुद्र तट से टकरा जाती हैं, लेकिन बड़ी लहरों को आने में काफी समय लग जाता है। जब भूकंप का केंद्र समुद्र तट से दूर होता है तो सुनामी की लहरों को समुद्र तट तक पहुंचने में ज्यादा वक्त लगता है।
देर से क्यों आती हैं सुनामी की ऊंची लहरें?
जब बड़ा भूकंप आता है तो सुनामी की चेतावनी जारी की जाती है। दरअसल शुरुआत में समुद्र का पानी पीछे हटता है और समुद्री बीच बड़ा हो जाता है। इसके कुछ देर बाद समुद्र की लहरें काफी तेजी से किनारे की ओर लौटती हैं। यह ठीक वैसे ही है, जैसे आप किसी बड़े से बर्तन को पानी से आधा भर लें और फिर उसे एक तरफ झुकाकर तेजी से वापस स्थिर कर दें। ऐसे में पानी दूसरे किनारे पर तेजी से लगता है। सुनामी की लहर ऊंची दीवार की तरह आगे बढ़ती हैं और रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर देती हैं।
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सुनामी की लहरों की स्पीड
सुनामी की लहरों की स्पीड 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी ज्यादा हो सकती है। यह धरती पर चलने वाले किसी भी वाहन से ज्यादा स्पीड है। इस स्पीड से हवाई जहाज उड़ते हैं। हालांकि, सुनामी की लहरों की स्पीड गहरे पानी में ही इतनी होती है, जैसे-जैसे यह किनारे की ओर बढ़ती हैं इनकी स्पीड कम हो जाती है। लेकिन किनारे की ओर बढ़ने पर इनकी ऊंचाई भी तेजी से बढ़ने लगती है। समुद्र तल के खिसकने के कारण ऐसा होता है।
जापान में 2011 की सुनामी के सबक
जापान में साल 2011 में 9.1 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। उस समय भूकंप के बाद सुनामी ने जापान में तबाही मचा दी थी। जापान में दोपहर को 2.46 बजे भूकंप आया था। इसके तीन घंटे बाद सुनामी की लहरें रूस के उसी कमचटका प्रायद्वीप के तट तक पहुंच गई, जहां आज 30 जुलाई 2025 को भूकंप आया है। जापान के 2011 के एपिसेंटर से कमचटका की दूरी 750 किमी है। सुनामी की लहरें 9 घंटे में अलास्का की खाड़ी में पहुंच गईं और फिर 40 मिनट बाद ही कैलिफोर्नियां और 30 घंटे बाद सुनामी की यह लहरें दक्षिण अमेरिका के तट तक पहुंच गई थीं।
सुनामी क्यों आती है?
आमतौर पर समुद्र तल के नीचे भूकंप आने की वजह से सुनामी की ऊंची-ऊंची लहरें उठती हैं। जब कभी भूकंप में अचानक समुद्र तल खिसकता है तो रिपल इफैक्ट के चलते बड़ी मात्रा में समुद्री पानी लहरों के रूप में बाहर यानी समुद्र के किनारों की ओर जाता है। यह लहरें भूकंप के एपिसेंटर के चारों तरफ जाती हैं। समुद्र में ज्वालामुखी विस्फोट के कारण भी सुनामी की लहरें उठती हैं। ग्लेशियरों के टूटने के कारण भी सुनामी की लहरें उठती हैं।
