Pakistan Petrol-Diesel Price Hike: एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कराकर दुनिया में वाहवाही लूटने की कोशिश में पाकिस्तान जुटा है। वहीं, दूसरी ओर वहां की सरकार ने एक बार फिर जनता पर महंगाई का 'बम' फोड़ा है।
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर हुई बढ़ोतरी। AI IMAGE
शहबाज सरकार ने देश में महंगाई से जूझ रही जनता पर एक और बड़ा बोझ डालते हुए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में भारी इजाफा किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 26.77 रुपये प्रति लीटर की समान वृद्धि की गई है।
इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की नई कीमत 393.35 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 380.19 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। ये नई दरें 25 अप्रैल (शनिवार) आधी रात से प्रभावी हो गई हैं।
बता दें कि पिछले महीने पाकिस्तान ने डीजल और पेट्रोल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ा दी थीं। डीजल की कीमत 55% से ज्यादा बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी, जबकि पेट्रोल की कीमत लगभग 55% बढ़ाकर 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी
कीमतों में इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकार द्वारा पेट्रोलियम लेवी में की गई वृद्धि को माना जा रहा है।
विशेष रूप से डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं और अन्य आवश्यक सेवाओं की कीमतों में और अधिक तेजी आने की आशंका है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव जारी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर बनी हुई है। सामरिक दृष्टि से यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग किसी भी कारण से बाधित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी। ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराते इस खतरे ने न केवल तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचाने का डर पैदा कर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। आपूर्ति में मामूली बाधा भी वैश्विक स्तर पर महंगाई और आर्थिक मंदी का कारक बन सकती है।
