पड़ोसी देश पाकिस्तान में चरमराती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई ने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों और भारी-भरकम करों (टैक्स) के खिलाफ जमात-ए-इस्लामी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पंजाब प्रांत के लाहौर स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर पार्टी का धरना लगातार 10वें दिन भी जारी रहा।
महंगाई से तंग आकर सड़कों पर उतरा पाकिस्तान (प्रतीकात्मक फोटो)
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम उर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाई गई लेवी और ईंधन करों को समाप्त करे। अगर सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो 13 रबी-उल-अव्वल को देशव्यापी हड़ताल की तारीख का ऐलान कर दिया जाएगा। हाफिज नईम ने साफ चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर पूरे देश में सड़कें जाम की जाएंगी और लाखों की संख्या में लोग इस्लामाबाद की तरफ कूच करेंगे।
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'10 रुपये में मिले रोटी'
जमात प्रमुख ने पाकिस्तान की मौजूदा और पूर्ववर्ती सरकारों की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के हुक्मरान अपनी नाकामियों और आर्थिक बोझ को हमेशा आम नागरिकों की जेब पर डालते रहे हैं। पार्टी ने मांग रखी है कि ईंधन पर लगे टैक्स खत्म करने के साथ-साथ रोटी की कीमत घटाकर 10 रुपये की जाए ताकि गरीब जनता को सीधी राहत मिल सके।
धांधलियों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की
इसके अलावा, उन्होंने स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPP) को दिए जाने वाले महंगे ईंधन और कोयला आयात में हुई कथित धांधलियों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि गलत ऊर्जा नीतियों का खामियाजा जनता भारी-भरकम बिजली बिल चुका कर भुगत रही है। जमात-ए-इस्लामी ने सरकार की वार्ता समिति को सीधे धरना स्थल पर आकर जवाब देने की चुनौती दी है।
