Comparison of Afghanistan and Pakistan Military Strengths : डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पास एक बार फिर जंग की शुरुआत हो गई है। शुक्रवार तड़के पाकिस्तान की वायु सेना ने काबुल, पकतिया, पकतिका, खोस्त, नांगरहार, कुनार एवं नूरिस्तान में हवाई हमले किए। इसके जवाब में अफगान तालिबान ने डूरंड लाइन से लगे पाकिस्तानी चौकियों पर बड़े हमलों को अंजाम दिया। अफगान तालिबान का दावा है कि उसने अपने हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिकों एवं उसके एक फाइटर प्लेन को मार गिराया। अफगान तालिबान का यह भी दावा है कि उसने पाकिस्तान के 19 पोस्ट को अपने कब्जे में लिए हैं। तालिबान के इन हमलों पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने X पर अफगानिस्तान के खिलाफ 'खुली जंग' का ऐलान किया है।
सीमा पर 'दमा दम मस्त कलंदर' होगा-आसिफ
आसिफ ने कहा है कि अब सीमा पर 'दमा दम मस्त कलंदर' होगा। दोनों देशों के तेवरों से जाहिर है कि डूरंड लाइन पर संघर्ष तेज होगा। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों एक दूसरे को निशाना बनाएंगे। ऐसे में यहां जानना जरूरी है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान के पास कौन-कौन से हथियार हैं। पाकिस्तान की सेना की अगर बात करें तो यह एक पेशेवर फौज है। सैनिकों की संख्या एवं क्षमता के हिसाब से वह दुनिया की टॉप 10 देशों में शामिल है। जबकि तालिबान की गिनती अनियमित सेना के रूप में होती है। उसके पास पेशवेर सैन्य ढांचा नहीं है। इसके पास नियमित सेना की जगह लड़ाके हैं।
asif khwaza
पावर इंडेक्स में पाक का 14वां स्थान
ग्लोबल फायर पावर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक शक्तिशाली सेनाओं की रैंकिंग (पावर इंडेक्स) में पाकिस्तान का रैंक 14वां और अफगानिस्तान का 121वां रैंक है। पाकिस्तान के पास साढ़ छह लाख से ज्यादा सक्रिय सैनिक हैं। 1000 से ज्यादा टैंक, एफ-16 जैसे फाइटर प्लेन, घातक मिसाइलें और ड्रोन हैं। पाकिस्तान परमाणु हथियार संपन्न देश भी है। जबकि तालिबान के लड़ाकों को लेकर कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। रिपोर्टों में तालिबान के पास एक से दो लाख लड़ाके होने की बात कही जाती है।
गुरिल्ला युद्ध लड़ने में माहिर है तालिबान
रिपोर्टों में कहा गया है कि अगस्त 2021 में अमेरिका जब अफगानिस्तान से निकला तो उसने बड़ी संख्या में अपने हथियार वहीं छोड़ दिए। कहा जाता है कि अरबों डॉलर कीमत के ये हथियार अब तालिबान के पास हैं और तालिबान के लड़ाके अब इन हथियारों को चलाते हैं। पहाड़ी एवं दुर्गम इलाकों में तालिबान को लड़ने में महारत हासिल है। ये गुरिल्ला एवं छापेमार युद्ध से दुश्मन के छक्के छुड़ा देते हैं।
taliban
पाक की वायु सेना एक बड़ी ताकत
पाकिस्तान की सेना की बड़ी ताकत उसकी वायु सेना है। वायु सेना में 70,000 एक्टिव सैन्यकर्मी और 8,000 रिजर्व सैनिक हैं। पाकिस्तान के पास एफ-16, जेएफ-17, चेंगदू जे-10सी और मिराज 5 जैसे फाइटर प्लेन हैं। पाकिस्तान के पास एडब्ल्यू 139 एवं एमआई-15 जैसे कॉम्बैट हेलिकॉप्टर भी हैं। वहीं, तालिबान के पास न तो वायु सेना है और न ही कोई वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System)। उनके पास रॉकेट और गन हो सकते हैं लेकिन इनसे पाकिस्तानी फाइटर प्लेन को निशाना बनाना एक तरह से काफी मुश्किल है। सुपरसोनिक गति वाले पाक के फाइटर प्लेन अफगानिस्तान में कहीं पर भी हमला करके निकल सकते हैं।
pak jet
अनुभवी है पाक की खुफिया एजेंसी ISI
इंटेलिजेंस में भी पाकिस्तान काफी है। उसकी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की गिनती दुनिया की अनुभवी एवं बेहतरीन खुफिया एजेंसियों में होती है। आईएसआई ने लंबे समय तक तालिबान का समर्थन किया है। उसके लोग आज भी अफगानिस्तान में होंगे। जंग के हालात में वह तालिबान की तैयारियों एवं अभियानों की जानकारी पहले हासिल कर सकती है।
यूएस ने छोड़े थे करीब पांच लाख हथियार
बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब पांच लाख हथियार अमेरिकी हथियार जो कि तालिबान के पास थे, उनके बारे में अब कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हथियार या तो बेच दिए गए अथवा तस्करी के जरिए दूसरे आतंकवादी गुटों तक पहुंचाए गए। साल 2021 में तालिबान जब तख्तापलट किया तो अफगान सैनिक अपने हथियार और बख्तरबंद वाहन छोड़कर भाग गए। ये हथियार और गाड़ियां भी तालिबान के पास हैं। अमेरिका जो हथियार छोड़कर गया उनमें एम4 एवं एम 16 राइफल शामिल हैं।
pak army
तालिबान के पास हैं ये हथियार
तालिबान के पास AK-47, M16 और M4 कार्बाइन जैसी राइफलें हैं। AK-47 सोवियत दौर से उपयोग में है, जबकि M16 और M4 अमेरिका से मिले हथियारों में शामिल हैं। अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए Humvee, MRAP और अन्य बख्तरबंद वाहन भी तालिबान के कब्जे में आए। ये वाहन गश्त और सैन्य कार्रवाई में उपयोग होते हैं। तालिबान के पास RPG-7 रॉकेट लॉन्चर, भारी मशीन गन (जैसे DShK), मोर्टार और कुछ तोपें भी हैं। कुल मिलाकर, तालिबान के पास हल्के से लेकर भारी हथियारों तक का बड़ा जखीरा है, लेकिन तकनीकी रखरखाव और प्रशिक्षण उनकी बड़ी चुनौती है।
