Pakistan Politics: 9 मई को लाहौर हिंसा के सूत्रधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून का फंदा कसने का समय है, जो लोग भी उस कृत्य के लिए जिम्मेदार हैं उन्हें नहीं बख्शा जाएगा। यह बयान जब पाक सेना के प्रमुख जनरल मुनीर(pakistan army chief general munir) ने दिया तो इशारा सिर्फ इमरान खान की तरफ नहीं था। बल्कि उन तमाम राजनैतिक दलों के नेताओं के लिए थी जो सैन्य हस्तक्षेप का खुली या दबी जुबान विरोध करते हैं। जनरल मुनीर ने कहा कि कोई भी ताकत जो मुल्क के हितों के खिलाफ जाएगी उनसे सख्ती से बिना भेदभाव निपटा जाएगा। जानकार बता रहे हैं कि 9 मई को हिंसा को लेकर जिस तरह से आर्मी एक्ट और ऑफिसियल सिक्रेट्स एक्ट की मदद ली गई है उसके निशाने पर पूर्व पीएम और क्रिकेटर इमरान खान(imran khan) हैं। इमरान खान के पास इन दोनों हथियारों की काट नहीं है उन्हें जबरदस्त राजनीतिक नुकसान का सामना करना होगा।
पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष हैं जनरल मुनीर
इमरान को चुनौती, दूसरों को संदेश
जनरल मुनीर को खुले तौर पर इमरान खान नियाजी टक्कर दे रहे हैं। इमरान ने कहा भी था कि मुनीर को आर्मी चीफ बनाने के लिए क्या डील हुई है उसके बारे में वो सब जानते हैं। लेकिन बताएंगे नहीं। उनके इस बयान के बाद सेना प्रमुख की तरफ से इस तरह का बयान आना तय माना जा रहा था। लेकिन मुनीर ने जिस अंदाज में अपने इरादे जाहिर किए हैं उसे शहबाज शरीफ के लिए भी सही नहीं माना जा रहा है। शहबाज शरीफ को भी वो परोक्ष तौर पर आगाह कर रहे हैं कि फौजी ताकत को कमजोर ना समझना। इसका दूसरा अर्थ यह है कि सेना कभी नहीं चाहेगी कि नवाज शरीफ लंदन से इस्लामाबाद आएं। यहां बता दें कि जनरल साहिर शमसाद मिर्जा जोकि इस ,समय स्टॉफ कमेटी के ज्वाइंट चीफ है वो कमर जावेद बाजवा के पसंद रहे। लेकिन जनरल मुनीर के बारे में फैसला लंदन में नवाज शरीफ के घर पर हुआ था जिसके बारे में इमरान खान कई दफा बयान भी दे चुके हैं।
कौन हैं जनरल मुनीर
जनरल मुनीर को शरीफ सरकार ने इस आधार पर नियुक्त किया था कि वह इमरान नियाजी का मुकाबला करेंगे क्योंकि बाद में उन्हें डीजी (आईएसआई) के पद से हटाकर और उनकी जगह अपने पसंदीदा जनरल फैज हमीद को नियुक्त करके अपमानित किया था। एक शक्तिशाली जनरल मुनीर नवाज शरीफ के लिए वैसी ही समस्या पैदा कर सकता है, जैसी उनके दो अन्य नियुक्त जनरल कमर जावेद बाजवा और जनरल परवेज मुशर्रफ ने की थी क्योंकि बाजवा ने इमरान नियाजी के उत्थान में महत्वपूर्ण भी को सुनिश्चित किया था। और मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध के बाद अक्टूबर 1999 में उन्हें गद्दी से हटा दिया था। इमरान खान नियाजी अब उसी अमेरिका से सुरक्षा मांग रहे हैं जिस पर उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने का आरोप लगाया था वहीं 9 मई के बाद पाक सेना पर हमला करने वाले उनके बयानों ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि जनरल मुनीर उन्हें फिलहाल और कुछ समय के लिए राजनीतिक गुमनामी में धकेल देंगे।
