NATO summit 2026: उत्तर अटलांटिक संधि सगंठन (NATO) की बैठक तुर्किये में शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अंकारा पहुंच गए हैं। अंकारा हवाई अड्डे पर तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयर एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत किया। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में नाटो के रक्षा बजट एवं यूक्रेन को सैन्य मदद देने सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। तुर्किये के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह एर्दोगन की वजह से नाटो समिट में हिस्सा लेने के लिए जा रहे हैं। एर्दोगन को उन्होंने 'अपना मित्र और महान नेता बताया।'
तुर्किये के अंकारा में हो रही NATO समिट।
अभी अपनी GDP का 2 प्रतिशत खर्च कर रहे सदस्य देश
नाटो का रक्षा बजट बड़ा मुद्दा है। इस बैठक में रक्षा बजट पर गंभीर रूप से चर्चा होने की उम्मीद है। ट्रंप के दबाव के बाद नाटो के सदस्य देश अपना वार्षिक रक्षा खर्च 2035 तक बढ़ाकर अपनी जीडीपी का पांच प्रतिशत करने पर तैयार हुए हैं। अभी नाटो के सदस्य देश अपनी जीडीपी का दो प्रतिशत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इन दिनों यूक्रेन की राजधानी कीव पर रूस का हमला तेज हो गया है। रूसी हमलों को देखते हुए जेलेंस्की अमेरिका से पैट्रिएट मिसाइलों और हथियारों की मांग कर रहे हें। इस बैठक में नाटो की तरफ से यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य एवं आर्थिक सहायता के बारे में कोई फैसला हो सकता है।
बैठक में शामिल हो रहे सभी 32 सदस्य देश
इस समिट में सभी 32 नाटो सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। गठबंधन से बाहर के दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष यूक्रेन के व्लादिमीर जेलेंस्की और दक्षिण कोरिया के ली जे-म्युंग भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड अपने रक्षा या विदेश मंत्रियों को भेज रहे हैं। अमेरिकी-इजरायल और ईरान युद्ध से प्रभावित खाड़ी देश बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी अपने मंत्रियों को इस सम्मेलन में भेज रहे हैं। सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन वे अंकारा में डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक द्विपक्षीय बैठक कर रहे हैं।
रक्षा बजट और ट्रंप की भूमिका
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति चुनाव अभियान के समय से ही नाटो (NATO) की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क था कि अमेरिका इस गठबंधन के खर्चों का एक अनुचित और बहुत बड़ा हिस्सा खुद उठाता है। उस समय, केवल पांच देश ही रक्षा पर अपनी जीडीपी (GDP) का तय किया गया दो प्रतिशत खर्च कर रहे थे। साझा रक्षा जिम्मेदारी को लेकर ट्रंप के इन सवालों के हाल के वर्षों में कुछ परिणाम देखने को मिले हैं, क्योंकि गठबंधन के सदस्य देशों ने अपने रक्षा बजट को बढ़ाने का संकल्प लिया है।
वादों को हकीकत में बदलना
'जर्मन मार्शल फंड' के तुर्किए क्षेत्रीय निदेशक, ओजगुर उनलुहिसारसिकली का मानना है कि नाटो इस साल पिछले साल किए गए वादों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। नाटो सहयोगियों ने पिछले साल द हेग में अपने रक्षा खर्च को बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने का फैसला किया था और यूरोपीय सहयोगियों ने अपने रक्षा उद्योगों को अपग्रेड करने के लिए कदम उठाए थे। इस साल अंकारा में चर्चा इस बात पर होगी कि इस खर्च को वास्तविक सैन्य क्षमताओं में कैसे बदला जाए। इसलिए, यह गठबंधन पिछले साल की तुलना में अब अधिक मजबूत है।"
