रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की यूक्रेन यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। राजधानी कीव पहुंचकर उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री अंद्री सिबीहा (Andrii Sybiha) से द्विपक्षीय बातचीत की। इस मुलाकात के दौरान जयशंकर ने पूरी दुनिया को एक बार फिर वही संदेश दोहराया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते आए हैं- "यह दौर युद्ध का नहीं है।" भारत ने साफ कर दिया है कि किसी भी जंग का फैसला गोली-बारूद से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति की मेज पर ही संभव है।
कीव में बोले जयशंकर
कीव की सरजमीन से बोलते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हर बीतता दिन केवल तबाही और बेगुनाह लोगों की मौतें लेकर आता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत किसी भी ऐसे प्रयास का हिस्सा बनने या मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त कर सके। उन्होंने साफ कहा कि मुख्य फैसला तो युद्ध में शामिल दोनों देशों को ही करना है, लेकिन अगर भारत इसमें कोई सकारात्मक भूमिका निभा सकता है, तो वह पीछे नहीं हटेगा।
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हर बेगुनाह इंसान की मौत पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मानवीय क्षति-जयशंकर
वार्ता के दौरान विदेश मंत्री ने उस दुखद घटना का भी उल्लेख किया जिसमें दो दिन पहले कीव में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई थी। उन्होंने इस दुखद क्षति पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हर बेगुनाह इंसान की मौत पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मानवीय क्षति है। इसके अलावा, जयशंकर ने समुद्र में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने याद दिलाया कि इस युद्ध की वजह से ईंधन, उर्वरक और अनाज की किल्लत बढ़ गई है, जिससे 'ग्लोबल साउथ' के विकासशील देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यूक्रेन को भारत ने अब तक 160 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी
युद्ध की चुनौतियों के बावजूद भारत और यूक्रेन के रिश्तों में आई मजबूती का जिक्र करते हुए जयशंकर ने बताया कि भारत अब तक यूक्रेन को 160 टन से अधिक राहत सामग्री भेज चुका है। इसमें जनरेटर, दवाएं और मेडिकल उपकरण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते कायम हैं। भारत का रुख एकदम स्पष्ट है कि अंतहीन संघर्ष की जगह अब शांति की शुरुआत होनी चाहिए।
