Iran War Ceasefire: अमेरिका और ईरान के युद्ध में फिलहाल दो हफ्ते के लिए विराम लग गया है। अमेरिका की तरफ से सीजफायर की घोषणा की गई और ईरान भी इस पर राजी हो गया है। 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर जबरदस्त हमला बोला था, जिसमें ईरान की टॉप लीडरशिप का खात्मा कर दिया गया। इसके बाद ईरान ने भी इजरायल और मिडल-ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए। इस युद्ध में वह दिन भी आया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की पूरी सभ्यता को नष्ट कर देने की बात कही और फिर उसी दिन दो हफ्ते के लिए सीजफायर की घोषणा भी हो गई। इस सीजफायर को Donald Trump भले ही अपनी छाती पर मेडल की तरह सजा लें, लेकिन इसमें ईरान को भी अपनी जीत दिख रही है। सीजफायर के लिए जिन 10 प्वाइंट पर बात बनी है, उसे देखते हुए तो लगता है कि इस डील में ईरान का हाथ अमेरिका से ऊपर ही रहा है। चलिए जानते हैं कैसे -
न्यूक्लियर प्रोग्राम जारी रखने के लिए ईरान ने अमेरिका को मना लिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया हैंडल ट्रूथ सोशल पर ईरान युद्ध में दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा की। उन्होंने जानकारी देते हुए लिखा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया है। कुल मिलाकर फिलहाल दो हफ्ते के लिए इस विनाशकारी युद्ध पर ब्रेक लग चुका है। ईरान की तरफ से भी युद्ध विराम के फैसले पर मुहर लग चुकी है। इसी के साथ होर्मुज स्ट्रेट (होरमूज जलडमरूमध्य) भी खुल गया है। ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि ईरानी सैन्य प्रबंधन के तहत होर्मूज से दो हफ्तों तक जहाजों को आवागमन की अनुमति दी जाएगी।
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर किया सीजफायर का ऐलान
इन 10 शर्तों पर हुआ US-Iran War में युद्ध विराम
जिन 10 प्वाइंट पर युद्ध विराम हुआ है वह यहां दिए गए हैं। इनमें अमेरिका को गैर-अक्रामकता की गारंटी देने की बात भी कही गई है और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी नियंत्रण जारी रखने की बात भी है। ईरान पर से सभी प्राइमरी और सेकेंड्री सेंक्शन हटाने का शर्त भी शामिल है और ईरान को मुआवजा देने की बात भी है। युद्ध विराम की 10 शर्तें की लिस्ट यहां दी गई है।
- अमेरिका को मूल रूप से गैर-आक्रामकता (Non-Aggression) की गारंटी देनी होगी
- होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण जारी रहेगा
- यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) को स्वीकार करना होगा
- सभी प्राथमिक प्रतिबंध (Primary Sanctions) हटाए जाएंगे
- सभी द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) हटाए जाएंगे
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्ताव समाप्त किए जाएंगे
- IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्ताव खत्म किए जाएंगे
- ईरान को मुआवजा (Compensation) दिया जाएगा
- क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी होगी
- सभी मोर्चों पर युद्धविराम, जिसमें लेबनान के इस्लामिक रेजिस्टेंस के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल होगी
क्या अमेरिका ने ईरान के आगे घुटने टेक दिए?
इसके साथ ही ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि युद्धविराम का मतलब युद्ध का समाप्त होना, नहीं है। ईरान का कहना है कि हमारे हाथ अब भी तैयार हैं और अगर दुश्मन से जरा सी भी गलती हुई, तो उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। यानी इजरायल और अमेरिका की तरफ से ईरान की ओर किसी भी तरह की कोई हरकत एक बार फिर इस युद्ध की आग को भड़का सकती है। ऊपर दी गई शर्तों में सबसे अहम शर्त, शर्त नंबर 3 है, जिसे देखते हुए लगता है कि अमेरिका ने ईरान के आगे घुटने टेक दिए।
न्यूक्लियर प्रोग्राम जारी रखेगा ईरान!
शर्त नंबर तीन सबसे महत्वपूर्ण है। इस शर्त में कहा गया है कि अमेरिका को ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) को स्वीकार करना होगा। जबकि अमेरिका और इजरायल ने इस युद्ध की शुरुआत ही इस बात पर की थी कि ईरान परमाणु बम के स्तर का यूरेनियम संवर्धन कर रहा है और परमाणु बम बना सकता है। दावा तो यह भी किया जा रहा था कि ईरान के पास 460 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम हो सकता है। कहा जा रहा था कि यह 60 फीसद तक संवर्धित यानी एनरिच्ड है, जबकि परमाणु बम बनाने के लिए 80 फीसद तक एनरिच्ड यूरेनियम की आवश्यकता होती है।
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कहां तो यह कहा जा रहा था कि अमेरिकी सेना ईरान की धरती पर उतरकर इसी लगभग 460 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम को सुरक्षित निकालकर ले जाएगी। और कहां सीजफायर की 10 शर्तों के अनुसार अमेरिका को ईरान के यूरेनियम संवर्धन यानी Enrichment को स्वीकार करना होगा। यानी कुल मिलाकर बात ऐसी है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम (Nuclear Program) नहीं छोड़ेगा और जिस उद्देश्य के लिए अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर युद्ध किया था, वह उसे अधूरा छोड़कर युद्ध विराम के लिए तैयार हो गया है। जैसा कि ईरान कह रहा है, इस युद्ध में उनकी जीत हुई है... अगर सीजफायर की 10 शर्तों को गौर से पढ़ें तो निश्चित तौर पर अमेरिका को ईरान के आगे घुटने टेकने पड़े हैं।
