Iran US Peace Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक की सबसे सख्त चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कल इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। उन्होंने यह साफ संकेत दे दिया है कि अगर ईरान ने उनकी बात नहीं मानी तो पूरे देश को अंधेरे में धकेल दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने कहा कि नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने तक पाकिस्तान बातचीत के लिए कोई टीम नहीं भेजी जाएगी
अब ईरान से आर-पार के मूड में ट्रंप।(फोटो-ai)
ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सोमवार को इस्लामाबाद में ईरान के साथ दूसरे दौर की निर्णायक वार्ता के लिए पहुंच रहा है। यह बातचीत 22 अप्रैल को खत्म हो रहे सीजफायर से ठीक पहले हो रही है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘ट्रिगर प्वाइंट’ जैसे हालात
इस बीच Strait of Hormuz में बीते 24 घंटों में हालात तेजी से बिगड़े हैं। शनिवार को ईरानी बलों ने इस अहम समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर दिया और गुजरने की कोशिश कर रहे कई जहाजों पर फायरिंग की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ विदेशी जहाज जिनमें यूरोपीय झंडे और भारतीय झंडे वाले मालवाहक भी शामिल थे को निशाना बनाया गया। इससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और शिपिंग मूवमेंट लगभग ठप हो गया। ईरान द्वारा जहाजों पर फायरिंग और रास्ता बंद करने को ट्रंप ने सीज़फायर का सीधा उल्लंघन बताया है।उन्होंने लिखा कि ईरान ने कल होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलियां चलाईं, यह हमारे युद्धविराम समझौते का पूर्ण उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी सेना ने रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों को निशाना बनाया, जिनमें एक फ्रांसीसी जहाज और ब्रिटेन के ध्वज वाला एक मालवाहक जहाज शामिल था। ट्रंप ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले का शिकार हुए दो भारतीय जहाजों का कोई जिक्र नहीं किया। ट्रंप ने कहा कि ईरान की हत्या की मशीन को खत्म करने का समय आ गया है।
ट्रंप का आक्रामक रुख
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका बहुत ही फेयर डील ऑफर कर रहा है, लेकिन अगर ईरान ने इसे ठुकराया, तो वह हर पावर प्लांट और हर ब्रिज को खत्म कर देगा। उन्होंने अपनी ट्रुथ सोशल पर की गई पोस्ट में भी लिखा, 'नो मोर मिस्टर नाइस गाइ' यानि अमेरिका अब सख्ती से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने लिखा, 'वे जल्दी और आसानी से मान जाएंगे, और अगर वे समझौते को स्वीकार नहीं करते हैं, तो मेरे लिए वह करना सम्मान की बात होगी जो आवश्यक है, जो पिछले 47 वर्षों में अन्य राष्ट्रपतियों द्वारा ईरान के साथ किया जाना चाहिए था'।
गौरतलब है कि रणनीतिक रूप से यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम 'ऑयल चोक पॉइंट्स' में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
पाकिस्तान बना कूटनीतिक मंच
पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब पाकिस्तान एक बार फिर दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका में है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में मध्य-पूर्व के देशों का दौरा कर बातचीत के लिए माहौल तैयार किया है। ट्रंप की धमकी के बाद अब पूरी दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि हालात शांत होंगे या मध्य-पूर्व एक बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।
