ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार को मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू करने के लिए पड़ोसी देशों से माफी मांगी। दुनिया उनके रुख को लेकर चौंकी, लेकिन इसकी शासन के भीतर के कट्टरपंथियों को नाराज कर दिया है। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई, जो राष्ट्रपति सहित तीन सदस्यीय अस्थायी नेतृत्व परिषद के कट्टरपंथी सदस्य हैं, उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रीय देशों के भूभाग का इस्तेमाल खुलेआम और गुप्त रूप से देश पर हमले करने के लिए किया जा रहा है, और जवाबी हमले जारी रहेंगे। मोहसेनी-एजेई ने X पर पोस्ट किया, क्षेत्र के कुछ देशों का भूगोल- खुलेआम और गुप्त रूप से दुश्मन के हाथों में है, और इनका इस्तेमाल हमारे देश के खिलाफ आक्रामकता के कामों में किया जा रहा है। इन टारगेट पर तेज हमले जारी रहेंगे। इस तरह के मतभेद तब सामने आए हैं जब अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और खाड़ी देश इस युद्ध की चपेट में आ चुके हैं।
बैकफुट पर आए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान
'जब तक अमेरिकी ठिकाने बने रहेंगे, तब तक शांति नहीं'
पेजेश्कियन के बयान से शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से संबंध रखने वाले एक प्रमुख ईरानी अधिकारी भी नाराज नजर आए। ईरान के संसद अध्यक्ष और पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड जनरल मोहम्मद बगेर गालिबफ ने X पर कहा कि जब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद रहेंगे, तब तक देशों को शांति नहीं मिलेगी।
इसी बीच, कट्टरपंथी धर्मगुरु और ईरानी सांसद हामिद रसाई ने X पर लिखा, "मिस्टर पेजेश्कियन, आपका रुख गैर-पेशेवर, कमजोर और अस्वीकार्य था।" उन्होंने राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा घरेलू हंगामे के बाद आंशिक रूप से संशोधित किए गए बयान का जिक्र किया। पेजेश्कियन ने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा था, "मैं पड़ोसी देशों से माफी मांगता हूं। हमारा किसी अन्य देश पर आक्रमण करने का कोई इरादा नहीं है।" सार्वजनिक बयान में कहा गया कि ईरान की नेतृत्व परिषद हमलों को लेकर सशस्त्र बलों के संपर्क में थी।
उन्होंने कहा, "अब से, उन्हें पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करना चाहिए या उन पर मिसाइलें नहीं दागनी चाहिए, जब तक कि वे देश हम पर हमला न करें। मेरा मानना है कि हमें इसे कूटनीति के माध्यम से हल करना चाहिए।" पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस्लामी गणराज्य के बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग को एक सपना कहकर खारिज कर दिया था।
बैकफुट पर आए पेजेश्कियन
हालांकि, अमेरिका विरोधी रुख के बावजूद माफी पर कट्टरपंथियों की कड़ी प्रतिक्रिया ने राष्ट्रपति कार्यालय को यह दोहराने पर मजबूर कर दिया कि ईरान की सेना क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों से होने वाले हमलों का कड़ा जवाब देगी। ईरानी राष्ट्रपति ने बाद में सोशल मीडिया पर अपने बयान को दोहराते हुए माफी वाला हिस्सा हटा दिया। अब कयाल लग रहे हैं कि क्या पेजेश्कियन को अपने माफी वाले बयान पर किसी तरह की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
आईआरजीसी ने पेजेश्कियन के बयानों को खारिज किया
पेजेश्कियन की घोषणा के कुछ घंटों बाद आईआरजीसी ने दावा किया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी के पास अल धाफरा वायु सेना अड्डे पर स्थित अमेरिकी हवाई युद्ध केंद्र पर हमला किया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन में स्थित एक अड्डे पर भी अमेरिकी सेना को निशाना बनाया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा उद्धृत एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, दोहा में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
आईआरजीसी उन सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों को नियंत्रित करता है जो इजराइल और अन्य देशों को निशाना बना रही हैं। आईआरजीसी पहले सिर्फ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति जवाबदेह था, जिनकी 28 फरवरी को तेहरान पर हुए संयुक्त अमेरिकी-इजराइली हमले में मौत हो गई थी। एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि अब यह रिवोल्यूशनरी गार्ड अपने लक्ष्य खुद चुनता हुआ लग रहा है।
