ईरान के ड्रोन हमले अमेरिका पर भारी पड़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी डिफेंस सिस्टम को नाकाम कर ये छोटे-छोटे ड्रोन सटीकता से हमले को अंजाम दे रहे हैं। सैटेलाइट इमेज और वीडियो से यह खुलासा हुआ है। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया विश्लेषण के अनुसार ईरान के ड्रोन हमलों ने कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर दी है।
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद भी हमले में कमी नहीं (फोटो- AP)
सात देशों पर अटैक के निशान
एनबीसी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार दर्ज 26 मामलों में से 21 में ईरानी ड्रोन अपने तय लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। इन हमलों का निशाना परिवहन केंद्र, कूटनीतिक ठिकाने, ऊर्जा ढांचा और सैन्य अड्डे जैसे कई रणनीतिक स्थान रहे हैं। वीडियो प्रमाणों और रिपोर्टों के आधार पर किए गए अध्ययन में बताया गया है कि ईरान के ड्रोन हमलों का प्रभाव कम से कम सात देशों में देखा गया है।
शाहेद-136 नामक ड्रोन बरपा रहा है कहर
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान अक्सर शाहेद-136 नामक ड्रोन का इस्तेमाल करता है। यह मानव रहित विमान करीब 1,200 मील तक उड़ान भर सकता है और इसमें लगभग 110 पाउंड वजनी विस्फोटक ले जाए जा सकते हैं। इन ड्रोन को पहले से तय निर्देशांकों पर हमला करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है और इन्हें चलाने के लिए पायलट की जरूरत नहीं होती। विशेषज्ञ इसे “असममित युद्ध” का बड़ा प्रतीक मानते हैं, क्योंकि कम लागत वाले ये ड्रोन बड़े सैन्य ढांचे को चुनौती दे सकते हैं।
कई अमेरिकी ठिकानों पर हमला
इस बीच ईरान की नौसेना ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य अड्डों के अंदर कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें अल धफरा, शेख ईसा और अल-उदीद जैसे अड्डे शामिल बताए गए हैं। आईआरजीसी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने कहा कि इन हमलों में अमेरिकी पैट्रियट रडार सिस्टम, कंट्रोल टावर, विमान हैंगर और ईंधन भंडारण केंद्रों को नुकसान पहुंचाया गया। आईआरजीसी के अनुसार अल धफरा बेस पर पैट्रियट रडार, कंट्रोल टावर और एयर डिफेंस हैंगर को कामिकाजे ड्रोन और सटीक बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया गया। वहीं शेख ईसा बेस के शुरुआती चेतावनी रडार, विमान हैंगर और ईंधन डिपो को भी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है। अल-उदैरी हेलीकॉप्टर बेस पर उपकरण हैंगर और रखरखाव केंद्रों को भी तबाह करने की बात कही गई है।
