अमेरिकी और इजरायली बलों की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। जिसके बाद अब खाड़ी देश में नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत हो गई है। नए सुप्रीम लीडर के चयन तक शासन की जिम्मेदारी संभालने वाली तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद में एक और सदस्य को शामिल कर लिया गया है। 66 वर्षीय धर्मगुरु अयातुल्ला अली रेजा अराफी को इस परिषद में नियुक्त किया गया है।
कौन हैं अली रेजा अराफी?
खामेनेई की मौत के बाद आयतुल्ला अली रेजा अराफी को मिली कमान
खामेनेई की मौत के बाद 66 वर्षीय ईरानी धर्मगुरु आयतुल्ला अली रेजा अराफी को तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद में शामिल किया है,जो अंतरिम कमांडर होंगे। आसान शब्दों में कहें तो जब तक नया सुप्रीम लीडर चुना नहीं जाता है तब तक आयतुल्ला अली रेजा अराफी ही कमान संभालेंगे।
इससे पहले, आयतुल्ला अली रजा अराफी संवैधानिक निगरानी संस्था गार्जियन काउंसिल और विशेषज्ञों की सभा (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) के सदस्य रह चुके हैं। वर्ष 2019 में दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने उन्हें गार्जियन काउंसिल का सदस्य नामित किया था। अराफी 2016 से ईरान के मदरसों के प्रमुख और 2015 से क़ोम के शुक्रवार की नमाज़ के इमाम के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वे 2008 से 2018 तक अल-मुस्तफ़ा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष थे ।
पिता थे रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगी
अलीरेज़ा अराफी का जन्म वर्ष 1959 में ईरान के यज़्द प्रांत के मयबोद शहर में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद इब्राहिम अल-अराफी, इस्लामी क्रांति के नेता रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगियों में माने जाते थे। क्रांति से पहले उनके पिता एक जाने-माने धार्मिक उपदेशक और लेखक के रूप में सक्रिय थे।
अराफी ने विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) की सदस्यता के लिए गार्जियन काउंसिल द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बावजूद, ईरान में विशेषज्ञों की सभा के चुनावों को नियंत्रित करने वाले कानून के अनुच्छेद III के तहत उन्हें 2015 के चुनाव में उम्मीदवार के रूप में मंजूरी दी गई। यह प्रावधान ईरान के सर्वोच्च नेता को विशेष विवेकाधिकार देता है, जिसके तहत वे गार्जियन काउंसिल की सामान्य शर्तों को दरकिनार कर किसी उम्मीदवार को स्वीकृति प्रदान कर सकते हैं।
क्या है असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स?
गौरतलब है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही देश के नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। उन्हें 2019 में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने गार्जियन काउंसिल का सदस्य नामित किया था,जिससे उनकी प्रणाली में मजबूत पकड़ मानी जाती है। अब अराफी इस अंतरिम नेतृत्व परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसनी एजहेई के साथ शामिल होंगे। यह परिषद तब तक देश के प्रमुख निर्णयों की निगरानी और संचालन करेगी, जब तक नया सर्वोच्च नेता चुना नहीं जाता।
ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद कैसे काम करती है?
- सुप्रीम लीडर का पद खाली होने पर ईरान के संविधान के तहत अंतरिम नेतृत्व परिषद का गठन होता है।
- परिषद का उद्देश्य नए सुप्रीम लीडर के चयन तक शासन में निरंतरता बनाए रखना है।
- इसमें राष्ट्रपति (वर्तमान में मसूद पेज़ेश्कियन) स्वतः सदस्य होते हैं।
- देश के मुख्य न्यायाधीश (गुलाम-हुसैन मोहसनी एजई) भी परिषद का हिस्सा होते हैं।
- गार्जियन काउंसिल से एक वरिष्ठ धर्मगुरु तीसरे सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है।
- यह तीनों मिलकर प्रशासन, सुरक्षा और रणनीतिक फैसले लेते हैं।
- परिषद अस्थायी व्यवस्था होती है और नए सुप्रीम लीडर के चयन के बाद स्वतः समाप्त हो जाती है।
