ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची इसी हफ्ते भारत आ रहे हैं। वे 14-15 मई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। भारत की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अरागची का यह दौरा कूटनीतिक रूप से कहीं अधिक गहरा माना जा रहा है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची आ रहे भारत।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर उत्पन्न चुनौतियों के बीच, ईरानी विदेश मंत्री की भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली द्विपक्षीय बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस मुलाकात के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित व्यापारिक मार्ग और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की पूरी संभावना है।
बैठक में शामिल होंगे विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव
अरागची का यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि इसी बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल हो रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर त्रिपक्षीय संवाद की उम्मीद बढ़ गई है। इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं, जो भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर भविष्य की दिशा तय करने में सहायक होगी।
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए यह दौरा एक बड़े संतुलनकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां वह अपनी शांतिप्रिय नीति के साथ ईरान जैसे पुराने सहयोगी और पश्चिम के देशों के बीच एक सेतु की भूमिका निभा सकता है। इस दौरे से न केवल भारत-ईरान संबंधों को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर BRICS देशों की एकजुटता का संदेश भी जाएगा।
