Iran Strait of Hormuz Toll Fee: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हाल ही में हुए 14-सूत्रीय शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद ही नए कूटनीतिक तनाव के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने इस समझौते को वाशिंगटन की राजनयिक जीत मानने से साफ इनकार करते हुए इसे 'अमेरिकी नाकामी का एक रिकॉर्ड' करार दिया है। इसके साथ ही ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर 60 दिनों के बाद 'टोल टैक्स' यानी पारगमन शुल्क लगाने का बड़ा ऐलान कर दिया है।
युद्ध खत्म, लेकिन 60 दिनों बाद होर्मुज में फिर खड़ी हो जाएगी परेशानी? ईरान बोला- शांति समझौते पर दस्तखत करना 'US की नाकामी' (AP)
'होर्मुज में युद्ध से पहले वाली स्थिति अब नहीं लौटेगी'- ईरान
इरानी सरकारी टेलीविजन पर बोलते हुए मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, 'यह शांति समझौता कुछ और नहीं बल्कि अमेरिका की नाकामी का एक दस्तावेज है, जिसे दुनिया देखेगी और खुद फैसला करेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य अब कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगा। इस जलमार्ग पर ईरान का संप्रभु अधिकार है, और जाहिर तौर पर हम यहां दी जाने वाली सेवाओं के बदले वाणिज्यिक जहाजों से फीस वसूलेंगे।'
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी स्पष्ट किया कि इस समुद्री मार्ग का प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था ईरान और ओमान द्वारा संयुक्त रूप से संभाली जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए यह जरूरी है कि ईरान को बिना किसी बाधा के कच्चे तेल का निर्यात करने, शिपिंग बीमा प्राप्त करने और अंतरराष्ट्रीय राजस्व तक पहुंच बनाने की पूरी आजादी हो।
60 दिनों की मिली है 'टोल-फ्री' छूट
इस 14-सूत्रीय समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू किया गया है ताकि महीनों से ठप पड़े वैश्विक व्यापार को फिर से शुरू किया जा सके। इसके तहत जहाजों को शुरुआती 60 दिनों के लिए बिना किसी शुल्क (टोल-फ्री) के गुजरने की अनुमति दी गई है, ताकि इस दौरान दोनों देश एक स्थायी समाधान पर बात कर सकें।
इस शांति समझौते की खबर आते ही वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगभग 5 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, शिपिंग विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी में महीनों से फंसे सैकड़ों जहाजों के ट्रैफिक को क्लियर करने और समुद्र में बिछाई गई नौसैनिक माइंस (बारूदी सुरंगों) को हटाने में अभी कई हफ्ते लग सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने दी बड़ी रियायतें, आलोचकों के निशाने पर डील
इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खुलवाने के लिए ट्रंप प्रशासन को ईरान के सामने कई बड़े कदम पीछे खींचने पड़े हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों से नौसैनिक नाकेबंदी हटा ली है, उसे दोबारा तेल निर्यात करने की छूट दी है और अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज पड़ी ईरान की करीब 24 अरब डॉलर (लगभग ₹2 लाख करोड़) की संपत्ति को अनफ्रीज करने का खाका तैयार किया है।
अपने इस फैसले का बचाव करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर यह कदम नहीं उठाया जाता, तो पूरी दुनिया में भयानक आर्थिक मंदी आ जाती। हालांकि, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि यह 60 दिनों की समयसीमा लचीली है और अगर ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुन सकता है। दूसरी तरफ, वाशिंगटन में ट्रंप के विरोधी और इजरायल इस समझौते की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या उसके प्रॉक्सी नेटवर्क पर कोई लगाम नहीं लगाई गई है।
