Ajit Doval Wang Yi Meeting: भारत की मेजबानी में राजधानी दिल्ली में चल रही ब्रिक्स (BRICS Meeting) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति देखने को मिली है। सोमवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बेहद अहम और द्विपक्षीय बातचीत हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात की जानकारी देते हुए इसे "सकारात्मक और आगे की सोच रखने वाली" (constructive and forward looking) बताया है।
भारत-चीन संबंध
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने हाल के दिनों में द्विपक्षीय संबंधों में हुए घटनाक्रमों की समीक्षा की है। साथ ही दोनों देशों के बीच रिश्तों को धीरे-धीरे पटरी पर लाने की दिशा में हुई प्रगति पर भी संतोष जताया गया।
अजीत डोभाल के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी रहे मौजूद
बातचीत के दौरान एनएसए अजीत डोभाल ने इस बात पर खास जोर दिया कि भारत और चीन (India China Bilateral Talks 2026) के बीच एक स्थिर, भरोसेमंद और सकारात्मक संबंध होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी से दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और बेहतर समझ विकसित हो सकती है। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे अजीत डोभाल के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री, राजदूत विक्रम दोरईस्वामी और लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई भी मौजूद रहे।
2020 में गलवान घाटी विवाद के बाद रिश्तों में आई थी कड़वाहट
गौरतलब है कि साल 2020 में गलवान घाटी में हुए सीमा विवाद के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी। लेकिन साल 2024 के बाद से दोनों देशों ने तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तिआनजिन में हुई मुलाकात के बाद इस सिलसिले को और मजबूती मिली है।
दोनों शीर्ष नेताओं ने भी माना था कि भारत और चीन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि विकास के भागीदार हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के मंच पर डोभाल और वांग यी की यह मुलाकात दर्शाती है कि नई दिल्ली और बीजिंग दोनों ही अब टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए विवादों को सुलझाने और 21वीं सदी के बदलते वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता की ओर बढ़ने के लिए गंभीर हैं।
