कूटनीति के मामले पर पीएम मोदी का एक और मास्टरस्ट्रोक सामने आया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जो यूरोप रूस से तेल खरीदने का विरोध कर रहा था, बैन लगा रहा था, अब वहीं भारत के जरिए रूस के सस्ते तेल का लाभ उठा रहा है। यूरोप की कारों में भारत से रिफाइंड किया हुआ तेल जमकर इस्तेमाल हो रहा है। मतलब एक तीर से दो निशाने और दोनों में भी भारत को फायदा ही फायदा है।
क्या कहते हैं आंकड़े
एनालिटिक्स फर्म केप्लर की एक हालिया रिपोर्ट में दिखाया गया है कि भारत इस महीने रिफाइंड ईंधन का यूरोप का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है, साथ ही साथ रूसी कच्चे तेल की रिकॉर्ड मात्रा भी खरीद रहा है।
रिकॉर्ड निर्यात
भारतीय कच्चे तेल उत्पादों पर यूरोप की निर्भरता बढ़ी है। इस वृद्धि को रूसी पर प्रतिबंध से जोड़ा जा रहा है।आंकड़ों से यह भी पता चला है कि भारत से यूरोप का रिफाइंड ईंधन आयात प्रतिदिन 360,000 बैरल से अधिक होने वाला है।
रूस से खरीद रहा कच्चा तेल
यूक्रेन से जंग शुरू होने के बाद जब रूस पर प्रतिबंध लगना शुरू हुआ, तेल खरीदने से पश्चिमी देश मना करने लगे तब रूस ने भारत को सस्ते तेल का ऑफर दिया था। जिसे भारत ने तुरंत स्वीकार कर लिया था। इसे लेकर पश्चिमी देशों ने भारत पर काफी दवाब भी बनाया था, ताकि भारत रूस से तेल न खरीदे, लेकिन भारत सस्ता तेल खरीदता रहा। जिससे भारत को काफी फायदा हुआ है।
