चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में एक ऐतिहासिक घोषणा की गई, जिससे इस क्षेत्रीय संगठन के आर्थिक भविष्य को एक नई दिशा मिल सकती है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पुष्टि की कि SCO के सदस्य देशों ने एक विकास बैंक (Development Bank) की स्थापना पर सहमति दे दी है — एक ऐसा विचार, जिस पर पिछले 10 वर्षों से विचार-विमर्श चल रहा था।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी (फाइल फोटो- AP)
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10 वर्षों की मेहनत, एक बड़ा निर्णय
विकास बैंक की स्थापना का प्रस्ताव चीन की ओर से रखा गया था और इसे अब सदस्य देशों की मंजूरी मिल गई है। इस फैसले को वांग यी ने “क्षेत्र की दक्षता और सामाजिक विकास को बढ़ाने वाला कदम” बताया। भले ही अभी बैंक की स्थापना की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है, लेकिन इसकी स्वीकृति अपने-आप में एक कूटनीतिक और आर्थिक मील का पत्थर मानी जा रही है।
AIIB और NDB की तर्ज पर एक नया मॉडल
गौरतलब है कि चीन पहले भी ब्रिक्स के नव विकास बैंक (NDB) और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभा चुका है। इन दोनों बैंकों को शुरुआत में IMF, विश्व बैंक और ADB जैसे पश्चिमी संस्थानों के विकल्प के रूप में देखा गया था, लेकिन बाद में ये सह-वित्तपोषण के मॉडल पर उनके साथ काम करने लगे। SCO विकास बैंक भी इसी तर्ज पर काम करेगा और इसका उद्देश्य यूरो-एशियाई क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विज्ञान-तकनीक के क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना होगा।
भारत की भूमिका और संभावनाएं
भारत, जो SCO का एक महत्वपूर्ण सदस्य और संभावित रूप से बैंक का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक हो सकता है, इस पहल में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक उपस्थिति और तकनीकी क्षमता इस बैंक को स्थायित्व और संतुलन दे सकती है। इसके साथ ही भारत के लिए यह एक अवसर होगा कि वह चीन की अगुवाई वाले इस प्रयास में अपना संतुलित पक्ष बनाए रखते हुए अपने हितों की रक्षा कर सके।
