Iran US Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकाते-धमकाते अब गालियां देना भी शुरू कर दिया है। उन्होंने ईरान के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मंगलवार को भारी तबाही मचाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलता है तो वह यह सुनिश्चित करेंगे कि इस्लामिक गणराज्य के नेता सीधे नरम में जाएं। उन्होंने कहा कि मंगलवार का दिन ईरान के लिए 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' होगा, ये दोनों एक साथ होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने ट्रूथ पर एक पोस्ट में कहा, ''मंगलवार का दिन ईरान के लिए 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' होगा—ये दोनों ही एक साथ होंगे। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा!!! उस जलडमरूमध्य (Strait) को खोल दो, तुम पागल क*, वरना तुम नरक में रहोगे—बस देखते जाओ! अल्लाह की जय हो। राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प''
ईरान का ट्रंप पर पलटवार
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ट्रंप की धमकी पर पलटवार करते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं... 47 सालों में वे हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए। वह अब भी कुछ नहीं कर सकते हैं। 'ट्रंप के इस दावे पर कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया है' पर हकीम इलाही ने कहा कि हम इसका जवाब युद्ध के मैदान में और सड़कों पर दे सकते हैं। वे तीन दिनों के भीतर कुछ करना चाहते थे, लेकिन अब एक माह से ज्यादा समय बीत चुका है।
इससे पूर्व, ट्रंप ने दो हफ़्ते पहले हमले की धमकी दी थी, लेकिन उन्होंने जलमार्ग को खोलने की समयसीमा दो बार बढ़ाई थी। उन्होंने कहा था कि कि ईरानियों के साथ बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, युद्ध के कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रगति होने के संकेत बहुत कम दिखे हैं।
क्या ईरान के तेल पर कब्जा करेंगे ट्रंप?
इसके अतिरिक्त, फॉक्स न्यूज को दिए एक टेलिफोनिक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के तेल पर कब्जा करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह जल्द से जल्द समझौता नहीं करते हैं, तो मैं सब कुछ उड़ा देने और तेल पर कब्जा करने पर विचार कर रहा हूं। साथ उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि वाशिंगटन कल तक ईरान के साथ एक समझौता कर सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस साल की शुरुआत में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर ईरानी शासन की खूनी कार्रवाई के बाद, अमेरिका ने कुर्द मिलिशिया बलों के जरिए ईरानी प्रदर्शनकारियों को बंदूकें भेजकर उन्हें हथियारबंद करने की कोशिश की, लेकिन यह कोशिश विफल रही, क्योंकि कुर्दों ने हथियार को अपने पास रख लिया।
