अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बदलाव किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नए कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत संघीय सरकार के आधिकारिक कामकाज में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' और 'एआई' (AI) शब्दों की जगह अब 'सुपर इंटेलिजेंस' (Super Intelligence) और 'एसआई' (SI) शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा।
ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, AI का नाम बदलकर किया ‘सुपर इंटेलिजेंस’
'इनॉगरिंग द एरा ऑफ सुपर इंटेलिजेंस' आदेश जारी
इस नए आदेश का नाम ‘Inaugurating the Era of Super Intelligence’ रखा गया है। इसके तहत अमेरिकी संघीय विभागों और एजेंसियों को अपनी आधिकारिक चिट्ठियों, वेबसाइट्स, रिपोर्ट्स, पब्लिक कम्युनिकेशन और प्रशासनिक दस्तावेजों में इन नए शब्दों का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि, यह प्रशासनिक बदलाव पहले से जारी नियमों, सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स, ग्रांट्स और पुराने रिकॉर्ड पर पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं होगा।
प्रशासन का मानना है कि आज की तकनीक की क्षमताएं पुराने ‘Artificial Intelligence’ शब्द के दायरे से कहीं आगे जा चुकी हैं। इसके अलावा, आदेश के तहत राष्ट्रपति के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार (Assistant to the President for Science and Technology) को 60 दिनों के अंदर कांग्रेस के सामने ‘Super Intelligence’ की नई वैधानिक परिभाषा और मौजूदा कानूनों में जरूरी बदलावों का प्रस्ताव देने के निर्देश दिए गए हैं।
टेक कंपनियों के साथ ‘मोरली बाइंडिंग’ समझौता
इस बदलाव के साथ ही व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें ‘White House Accord on Super Intelligence’ पर चर्चा हुई। इस समझौते के तहत टेक कंपनियों ने अपनी तकनीक के लिए आंतरिक सुरक्षा नियंत्रण, बाहरी ऑडिट और कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू करने की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता जताई है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई, जेन्सेन ह्वांग और डारियो अमोदेई सहित टेक इंडस्ट्री के कई दिग्गज शामिल हुए। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस समझौते को ‘मोरली बाइंडिंग’ (नैतिक रूप से बाध्यकारी) करार देते हुए एआई और सुपर इंटेलिजेंस के विकास में अमेरिका के वैश्विक नेतृत्व पर विशेष जोर दिया।
बैठक के दौरान मेटा (Meta) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनियों का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह भरोसा दिलाना है कि तकनीक बिल्कुल वैसे ही काम करेगी, जैसे उसे डिजाइन किया गया है। वहीं, एंथ्रोपिक (Anthropic) के सीईओ डारियो अमोदेई ने इस तकनीक के बड़े फायदों के साथ-साथ इसके संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत पर बल दिया।
