Amazing Facts: 80 या 100 नहीं, घंटे में 60 मिनट ही क्यों होते हैं? वजह जानकर दिमाग घूम जाएगा!

History of Time: एक घंटे में 60 मिनट और एक मिनट में 60 सेकंड होने की परंपरा प्राचीन सुमेरियन और बेबीलोनियन सभ्यताओं से शुरू हुई। उन्होंने बेस-60 प्रणाली अपनाई, जो गणना के लिए बेहद आसान थी। समय के साथ मिस्र, यूनान और अन्य सभ्यताओं ने इसे अपनाया और आज यही सिस्टम पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रहा है।

60 Minutes in an Hour: आज हम सभी समय को घंटों, मिनटों और सेकंड में मापते हैं। यह इतना सामान्य हो चुका है कि हम शायद ही कभी सोचते हैं कि आखिर एक घंटे में 60 मिनट और एक मिनट में 60 सेकंड क्यों होते हैं? इसका जवाब हमें हजारों साल पुराने इतिहास में मिलता है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि समय को मापने का तरीका एक दिन में नहीं बना, बल्कि यह अलग-अलग सभ्यताओं (ancient civilizations time) के योगदान से धीरे-धीरे विकसित हुआ। प्राचीन सुमेरियन और बेबीलोनियन सभ्यताओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई। इन लोगों ने एक खास संख्या प्रणाली अपनाई थी, जिसे 'बेस-60' या सेक्सजेसिमल सिस्टम कहा जाता है। यानी वे गिनती के लिए 10 की जगह 60 को आधार मानते थे।

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60 मिनट और 60 सेकंड का सच (Photo: iStock)

माप, हिसाब-किताब और जमीन का बंटवारा करना बहुत आसान

अब सवाल यह है कि 60 ही क्यों चुना गया? इसका कोई एक स्पष्ट जवाब नहीं है, लेकिन एक बड़ा कारण इसकी उपयोगिता मानी जाती है। बीबीसी कि रिपोर्ट के मुताबिक 60 एक ऐसी संख्या है जिसे 1, 2, 3, 4, 5, 6, 10, 12, 15, 20, 30 और 60 से आसानी से विभाजित किया जा सकता है। इससे गणितीय काम जैसे माप, हिसाब-किताब और जमीन का बंटवारा करना बहुत आसान हो जाता था। यही वजह है कि उस समय के लोगों को यह प्रणाली काफी सुविधाजनक लगी। समय को घंटों में बांटने की शुरुआत प्राचीन मिस्र से मानी जाती है। करीब 2500 ईसा पूर्व के समय में मिस्रवासियों ने दिन और रात को अलग-अलग हिस्सों में बांटना शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने रात को 12 हिस्सों में बांटा, जो बाद में दिन के साथ मिलकर 24 घंटे बन गए। 12 का चुनाव क्यों किया गया, इसका पक्का कारण तो नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह तारों की गिनती या उंगलियों के जोड़ों से गिनती करने की वजह से हो सकता है।

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