Holi in Gujarat: बात अजब है पर सच है राजस्थान से लगी सीमा पर आए इस गांव ने पिछले 200 सालों में अबीर-गुलाल की रंगत नहीं देखी बल्कि इस दिन यहां सन्नाटा प्रसरा रहता है और लगता है मानो कि मातम मनाया जा रहा हो रामसन नामक यह गांव पौराणिक दृष्टि से रामेश्वर नाम से भी जाना जाता है यहां मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने यहां आकर रामेश्वर भगवान की पूजा अर्चना की थी।
200 वर्ष पहले यहां होली मनाने का रिवाज रहा करता था, लेकिन उस समय गांव में होली मनाने के बाद अचानक आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया तब के ज्योतिषाचार्य ने कहा कि श्री राम के अलावा कोई भी अगर होलिक दहन करेगा तो यही हश्र होगा फिल गांव में होलिका दहन को बंद किया गया और तब से आज तलक इस गांव में कभी न तो होली जलाई गई और न ही खेली गई
वैसे तो रामसन गांव की बस्ती लगभग 10 हज़ार के आसपास है और 200 सालों से ग्रामजन अनुशासन के साथ इस निर्णय को स्वीकार करतें हैं होलिका दहन के दिवस यहां मंदिर में आए हवनकुंड में सिर्फ धूप जलाकर पूजा अर्चना करने का रिवाज है इसके अलावा होली के दिन यहां मानो मातम पसरा रहता है कोई भी होली खेलने का जोखिम नहीं उठाता
गांव के श्रापित होने की किवदंतियां भी यहां प्रसिद्ध है लेकिन सबसे बडी बात यह है कि 200 वर्ष बाद भी यहां किसी ने होली जलाने और खेलने की हिमाकत आज तक नहीं ही अब इसे आस्था कहें या फिर अंधविश्वास लेकिन एक बात तो तय है कि गांववाले आज भी अपनी मान्यता पर उसी तरह विश्वास करतें हैं जैसे 200 साल पहले करते थे
