दुनिया में कई कंपनियां हैं जो अपने पॉलिसी को सबसे ऊपर रखती हैं। इससे वे कोई समझौता नहीं करतीं। हाल में सोशल मीडिया पर एक कंपनी अपने अजीबोगरीब ऑफिस पॉलिसी को लेकर चर्चा में है। दरअसल, इस ऑफिस में आने वाले लोगों को अपने जूते बाहर ही उतारकर अंदर घुसना पड़ता है। यानी कि यहां पर जूते पहनकर अंदर ऑफिस में एंट्री बैन है।
दरवाजे पर जूतों के लगे अंबार की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर इस वक्त जमकर वायरल हो रही है (X/@andrelandgraf)
कैसे शुरू हुई चर्चा?
यह कंपनी एक AI स्टार्टअप है और यह अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित है। सोशल मीडिया पर इस अजीबोगरीब नियम की चर्चा खूब हो रही है। जो लोगों को सुनने में काफी अजीब लग रहा है। इस नियम की चर्चा तब तेज हुई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर वायरल होने लगी। इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि लकड़ी के फर्श पर कई जोड़ी जूते बिखरे हुए दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर को क्यूपर्टिनो के एक डेवलपर आंद्रे लैंडग्राफ ने X अकाउंट से की थी। देखते ही देखते उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पोस्ट के वायरल होते ही लोगों ने इस पर कमेंट कर रिप्लाई देना शुरू कर दिया। जहां लोगों ने बताया कि, “यह तो कर्सर का ऑफिस है।”
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क्या है कर्सर?
Cursor एक AI बेस्ड कोडिंग स्टार्टअप है। यह कंपनी एक स्मार्ट कोड एडिटर बनाती है, जो डेवलपर्स को AI की मदद से कोड जल्दी लिखने और समझने में उनकी मदद करती है। इस स्टार्टअप की स्थापना 2022 में हुई थी। इसके सह-संस्थापकों में Michael Truell, Aman Sanger, Sualeh Asif और Aravind Lunnemark शामिल हैं। इनमें से अमन संगर भारतीय मूल के हैं और Massachusetts Institute of Technology (MIT) के पूर्व छात्र हैं।
क्यों लागू है ‘नो शू’ पॉलिसी?
कर्सर उन अमेरिकी स्टार्टअप्स में से एक है जहां ऑफिस के अंदर जूते पहनना जरूरी नहीं, बल्कि कई बार मना होता है। कंपनी का मानना है कि इससे ऑफिस का माहौल ज्यादा आरामदायक और घर जैसा महसूस होता है। साफ-सफाई भी बनी रहती है और कर्मचारी ज्यादा रिलैक्स महसूस करते हैं। कर्सर के एक कर्मचारी Ben Lang ने भी जूतों की तस्वीरें पोस्ट कर बताया था कि उन्होंने कई ऐसे स्टार्टअप्स में काम किया है जहां जूते पहनना अनिवार्य नहीं था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
